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सत्यं वद, धर्मं चर के जयघोष के बावजूद संसार का क्या हाल है? कितने लोग सत्य के दीपक जलाए हुए हैं? भारत की ही बात करें, तो यहां 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास सोशल मीडिया की पहुंच है और सोशल मीडिया...
बापू का जीवन एक तरह से प्रयोग था, इसमें उन्हें बड़ी सफलताएं मिलीं, तो कुछ अफसोस भी रह गए। विशेष रूप से उन्होंने अपने परिवार को जिस तरह से आगे बढ़ाया, उसे लेकर स्वयं उनके पुत्रों में असंतोष रहा। किसी...
दुनिया में राजनीतिक इंफ्लुएंसर की संख्या बढ़ती जा रही है और इस मोर्चे पर भारत किसी भी दूसरे देश से आगे है। भारत जितनी ही आबादी वाले देश चीन में राजनीतिक इंफ्लुएंसर प्रजाति के सोशल मीडिया मुगल मुमकिन...
गालियां स्वभाव या संस्कार का हिस्सा हैं। हर कोई गाली नहीं दे सकता। जो लोग दूसरों के प्रति सद्भाव से भरे होते हैं, वो कभी गालियां नहीं देते हैं। जिनके पास सद्भाव नहीं होता, जिनके पास दूसरों के लिए...
मैडोना पॉप गायिका व कलाकार वह एक ऐसा मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवार था, जिसमें बच्चे बड़े शरारती थे। बच्चों को न पिता टोकते थे और न मां डांटती थीं। उसी परिवार में एक बच्ची थी, जिसके दो बड़े भाई थे और दो...
मकबूल शेरवानी शहीद सेनानी तब कश्मीर की खूबसूरत वादियों में भी भारत की आजादी की बयार बहने लगी थी। अपने रंगारंग खुशनुमा मुल्क के ख्वाब देखते उस नौजवान की रगों में वतन के लिए बेहिसाब मुहब्बत ठीक वैसे ही...
(सरदार वल्लभभाई पटेल, महान राजनेता की कहानी) छायादार पेड़ हो या इंसान, किसी एक दिशा में नहीं, अनेक दिशाओं में बढ़ता है। जो बाहर से कड़क लगता है, वह अंदर नरम भी हो सकता है। ऐसे सज्जन भी होते हैं, जो समय...
(संविधान निर्माता सच्चिदानंद सिन्हा की कहानी) यह भी गजब प्रदेश है, जिसकी पीठ में रीढ़ की तरह मैया गंगा गुजरती हैं। वह जैसे ही बिहार की माटी का स्पर्श करती हैं, कर्मनाशा और घाघरा आ मिलती हैं। उत्तर में...
(राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत की पृष्ठभूमि कैसे तैयार हुई, पढ़िए) बहुत मजबूरी के दिन थे। भारत में भी अंग्रेजों का यह गीत लोग गाने लगे थे, ‘भगवान हमारे दयालु...
भारत में जब अच्छे छात्र नेताओं के नाम की चर्चा होती है, तब एक नाम कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद का जरूर आता है। कॉमरेड को शहीद हुए अब तीन दशक बीतने वाले हैं। साल 1997 में उनकी हत्या बिहार के शहर सिवान में...
यह बात वामपंथी भी मानते हैं और अपने मुखपत्रों में लिख-छाप चुके हैं कि ‘कॉकरोच इसलिए भी जीते, क्योंकि बदतमीज थे’। कॉमरेडों को शायद यह लगने लगा है कि बदजुबानी भी एक मुकम्मल जवाब हो सकती है। क्या गालियों...
कहा जाता है, जहां शब्द नाकाम हो जाते हैं, वहां गालियों की जरूरत पड़ती है। अच्छे लोगों के पास दूसरों को देने के लिए दुआएं होती हैं, पर कौन लोग हैं, जिनके पास दूसरों के लिए केवल गालियां होती हैं। दरअसल...
25 जुलाई की दोपहर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ी सांकेतिक सफलता है। हालांकि, इस सांकेतिक सफलता तक पहुंचने के क्रम में बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी चर्चा जरूर होनी चाहिए। इस...
काॅकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता के पीछे भाजपा की बढ़ती अलोकप्रियता का भी कुछ हाथ है, पर भाजपा की शक्ति को कम करके नहीं देख सकते। सत्ता में किसी पार्टी की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, उसके विरोधियों की...
ईरान में मातम और नाराजगी का माहौल है। जहां, अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी अलविदा कहते हुए ईरानवासी रो रहे हैं, वहीं, नाराजगी उस अमेरिका पर है, जिसकी वजह से ईरान को ऐसे दिन देखने...
पुरी में जगन्नाथ मंदिर से बस एक जिला दूर गांव सोबाला है, जहां एक अबोध बालक स्थानीय नाटक या यात्रा मंडली में काम करता था। अक्सर बालिका का अभिनय करता। कभी कोई वाद्य बजाता, तो कभी कुछ गाने का मौका भी मिल...
भारतीय लोक संस्कृति की एक मुखरतम कलाकार तीजन बाई की विदाई अपूरणीय क्षति है। लोक नाट्य की मनमोहक शैली पंडवानी ने अपना एक ऐसा रत्न खो दिया है, जिसकी ख्याति अपने देश में ही नहीं, पूरी कला दुनिया में थी।...
याद आ गया दंतेवाड़ा का गदापाल गांव छत्तीसगढ़ मुझे सदा से प्रिय रहा है। अति व्यस्त रही जिंदगी के बावजूद दो बार मुझे बस्तर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा जाने का मौका मिला है। दोनों ही बार जंगलों के बीच से सूनी...
समापन भाग भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा नाट्यशास्त्र आखिर जरूरी है? विशेष रूप से नाट्यशास्त्र का छठा और सातवां अध्याय बहुत काम का है और हमेशा काम का रहेगा। ये दो अध्याय ऐसे हैं, जो नाट्य समाज ही...
भाग – 3 भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा आधुनिक भारतीय अभिनय गुरु भारत के अपने सबसे बड़े दिग्गज नाट्यगुरु इब्राहिम अल्काजी भी लावस्की को ही मान्यता देते थे। लावस्की की अभिनय धारा में ही...