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स्वतंत्रता, संकोच और फिल्म शोले

(शोले के पचास वर्ष होने पर विशेष लेख, हिन्दुस्तान में प्रकाशित) भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष बेमिसाल है। दुनिया जानती है, इस संघर्ष के सबसे बड़े प्रतीक-प्रतिनिधि नेता मोहनदास करमचंद गांधी की बुनियाद...

शुभमान गिल, आकाश दीप ने रचा इतिहास

बर्मिंघम के मैदान पर भारत कभी टेस्ट मैच नहीं जीता था। टाइगर पटौदी से लेकर बुमराह की कप्तानी तक भारत को एक के एक हार मिलती रही। कुल आठ टेस्ट मैच हुए थे, जिनमें से केवल एक मैच भारत यहां ड्रा पर रोक पाया...

भारत कैसे और क्यों आए दलाई लामा

तेनजिन ग्यात्सो जन्मदिन – 6 जुलाई 14वें दलाई लामा जब जड़ें किसी जमीन से उखड़कर चोटिल होती हैं, तो शायद फिर कभी ठीक नहीं हो पाती हैं। इंसान के साथ भी ऐसा ही है, जन्मभूमि छूट जाए, तो दिल में लगी चोट...

खुदा के लिए समझिए कि हम भी कुछ समझते हैं – सरदार पटेल

सत्य सदा धर्म से ऊपर है। गलती करते हैं लोग, जब धर्म को ही सत्य मान लेते हैं और समस्या बन जाते हैं लोग, जब धर्म के अधीन असत्य का सहारा लेने लगते हैं। धर्म की विजय के लिए भी अगर कोई असत्य घटित होता है...

होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे मिर्जा ग़ालिब जब दिल्ली थे, तब यहां करीब तीन लाख लोग रहते थे, आज तीन करोड़ के करीब रहते हैं। उनके सामने ही दुनिया बच्चों के खेलने...

ए रंगबती रे रंगबती

ए रंगबती रे रंगबती रंगबती-रंगबती कनक लोता हसी पदे कह लो कोथा हाय गो लाजे-लाजे गो लाजे-लाजे लाज लागे नोई जाउछे माथा गो नाईकर नाईकर ओथा… यह गाना जब बजता है या याद आता है, तो नोस्टेलजिक बना देता...

महाकुम्भ मेला 2025 सुखद-दुखद स्मृतियां

महाकुम्भ मेला 2025 अपनी सुखद-दुखद स्मृतियों के साथ समाप्त होने को है। कितनों ने कितना पुण्य कमाया, यह विचार की बात नहीं है, सहज स्वीकार्य आस्था की बात है। तर्क अपनी जगह है और कुम्भ की अनेक बातें अपनी...

फिर लौट जाएंगे उस देश कुरजां

जाड़ा शुरू होने से पहले ही वो भारत आ जाते हैं और जाड़ा खत्म होते ही वापस लौट जाते हैं। अब भारत में गर्मी शुरू हो रही है और कुरजां के लौट जाने का समय हो रहा है। दूर देश से चले आते हैं पक्षी…दूर...

संस्कृत और देवनाथन जी की याद

(संस्कृत की चर्चा होती है, तो प्रोफेसर रामानुज देवनाथन जी मुझे अनायास याद आते हैं।) १८ फरवरी २०१६ को नई दिल्ली में उनसे अंतिम भेंट हुई थी। राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी पर केन्द्रित...

सिर्फ 18 रुपये 75 पैसे का था एक तोला सोना

सोने की बढ़ती कीमत आश्चर्य में डाल देती है। जब भी सोने की कीमत की चर्चा चलती है, तो लोग सोचने लगते हैं कि पहले कितना सस्ता था सोना। हालांकि, सच यही है कि सोना कभी सस्ता नहीं रहा है। आज सोने का भाव...

गंगा कभी-कभी उल्टी भी बहती है

भिखारी ठाकुर, प्रसिद्ध लोक कलाकार सागर के स्वभाव में ही ऐसा उफान है, जो देखने वाले के तन-मन में ज्वार का रोग लगा देता है। उस दिन यही तो हुआ था। एक युवा हजाम सागर के पास अचंभित खड़ा था, ठीक वैसे ही जैसे...

16 साल पहले भी मैं यही सोचता था

(दिसंबर 2008 में मैंने यह लिखा – अपने ब्लॉग ज्ञानघर पर। आज भी मेरी सोच पत्रकारिता और अपने बारे में ऐसी ही है। ) मैंने खबरों के साथ-साथ विचारों की भी पत्रकारिता खूब की है, अत: तमाम पार्टियों के...

सौ साल तक बजाता रहूं बांसुरी : पंडित हरिप्रसाद चौरसिया

प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया अब 86 वर्ष के हो चुके हैं। उनका जन्म प्रयागराज में हुआ था और अब वह मुंबई में रहते हैं। अभी भी बांसुरी वादन करते हैं और उनकी इच्छा है कि उम्र के सौ साल तक...

राधाजी ने बना दिया सर्वश्रेष्ठ नृत्यांगना

मार्था ग्राहम, प्रसिद्ध नृत्यांगना सच्ची लयकारी बाहर से नहीं आती, अंदर से उठती है और नृत्य का मन होता है। उस लड़की का मन भी लय से सराबोर था। अमेरिका के सांता बारबरा, कैलिफोर्निया में रहने वाला उसका...

टैगोर के बागबां ने बना दिया गुलजार

(भारत के एक महान गीतकार गुलजार पर लिखे गए वो लम्हा कॉलम से, यह कॉलम हिन्दुस्तान समाचार पत्र में प्रति रविवार प्रकाशित होता है) अब चार आना मतलब चवन्नी मतलब पच्चीस पैसे का कुछ नहीं आता, पर तब बहुत कुछ...

बाबा साहेब को फिर समझने की जरूरत

(बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की पुस्तक – पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन पढ़ने के बाद) लाहौर में मुस्लिम लीग ने साल 1940 में पाकिस्तान का प्रस्ताव रखा। देश भर में दंगे हुए, पर मुस्लिम लीग ने...

गंगा जी का सूखना और अंतिम युद्ध की तैयारी

भारतीय फिल्मों की कमाई के आंकड़े कभी बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं, पर इतना तय है कि अद्भुत फिल्मकार नाग अश्विन की फिल्म कल्कि 2898 एडी कमाई करने वाली टॉप दस भारतीय फिल्मों में शुमार हो चुकी है। इस फिल्म...

जब प्रभात झा 42 के थे और नरेंद्र मोदी 48

श्रद्धांजलि लेख बीसवीं सदी के समापन वर्ष बीत रहे थे। एक दिन भोपाल में अरेरा कॉलोनी स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचा। आलीशान पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिसर और उसमें दायीं ओर आवासीय परिसर था, जहां नंद कुमार...

हम भी अपने दस साल का हिसाब करें

भारतीय जनता पार्टी ने पिछले दस वर्षों में क्या-क्या किया है? प्रमुख विपक्षी दल अखिल भारतीय कांग्रेस ने पिछले दस वर्षों में कहां-कहां झंडे गाड़े हैं? वामपंथियों ने पिछले दस वर्षों में लोगों के बीच कैसे...

बिहार को क्या हरा देंगे ईशान किशन?

एक खिलाड़ी ईशान किशन का यहां जरूर नाम लेना चाहिए। बिहार खिलाड़ियों की उर्वर भूमि नहीं है, यहां पत्थर पर ही कभी-कभी फूल खिलते हैं। ईशान भी एक सुंदर फूल हैं। कम उम्र में ही एकदिवसीय क्रिकेट में दोहरा शतक...