होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे
बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे मिर्जा ग़ालिब जब दिल्ली थे, तब यहां करीब तीन लाख लोग रहते थे, आज तीन करोड़ के करीब रहते हैं। उनके सामने ही दुनिया बच्चों के खेलने का मैदान (बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल) थी, जहां रात-दिन तमाशा होता था। आज भी होता है, जब ग़ालिब नहीं हैं। लाल किले …





