सोने की बढ़ती कीमत आश्चर्य में डाल देती है। जब भी सोने की कीमत की चर्चा चलती है, तो लोग सोचने लगते हैं कि पहले कितना सस्ता था सोना। हालांकि, सच यही है कि सोना कभी सस्ता नहीं रहा है। आज सोने का भाव प्रति तोला 85 हजार रुपये तक पहुंच गया है, पर सौ साल पहले इतने ही सोने की कीमत केवल 18 रुपये 75 पैसे थी।
भारत का स्वर्ण प्रेम अनुपम है। भारत सोने का सबसे बड़ा या दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक रहा है। वल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार वर्ष 2001 में भारत में 843.2 टन सोने की मांग थी, जो विश्व की कुल मांग का 26.2 फीसदी थी। यहां प्रतिवर्ष 600 से 700 टन तक सोने की मांग रहती है, जबकि भारत स्वयं मात्र करीब 2 टन सोने का उत्पादन करता रहा है। यह कुछ अजीब ही है कि दुनिया में भारत को गरीब देश के नजरिए से देखा जाता है, लेकिन यहां 11 हजार टन से भी अधिक सोना मौजूद है। भारत की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में बसती है और 65 से 70 फीसदी ग्रामीण ही सोने की खरीदारी करते हैं। भारत में दिखने में जो लोग गरीब हैं, उनके पास भी स्वर्ण का छोटा खजाना मिल सकता है। स्वर्ण को महिलाओं की पूंजी माना जाता है। भारतीय घरों में महिलाएं भी स्वर्ण की देखरेख करती हैं।
आज भारतीय महिलाओं के पास दुनिया 11 प्रतिशत सोना है। एकदम एक आंकड़ा तो बताना मुश्किल है, क्योंकि कोई यह नहीं बताता कि उसके पास वास्तव में कितना सोना है। हालांकि, एक अनुमान के अनुसार, भारतीय घरों में 24,000 टन सोने के जेवर हो सकते हैं।
आज भारतीय रिजर्व बैंक के पास आधिकारिक रूप से 840 टन से ज्यादा का स्वर्ण भंडार है। हालांकि, आधिकारिक स्वर्ण भंडार के मामले में भारत का स्थान दुनिया में आठवां है। सबसे ज्यादा सोना अमेरिकी बैंक के पास है, जो 8133 टन से ज्यादा है। उसके बाद क्रमश: जर्मनी, इटली, फ्रांस, रूस, चीन, जापान के पास है। इसके बाद भारत का स्थान आता है और भारत के पास नीदरलैंड, तुर्किये सरकार के पास सोना है।
सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम
31/3/1925 : 18 रुपये 12 आना
31/3/1940 : 36 रुपये 8 आना
31/3/1951 : 98 रुपये
31/3/1960 : 111 रुपये 14 आना
31/3/1975 : 540 रुपये
31/3/1980 : 1,330 रुपये
31/3/1990 : 3,209 रुपये
31/3/1995 : 4,675 रुपये
21/2/ 2009 : 15,780 रुपये
01/2/2015 : 24,900 रुपये
01/2/2025 : 84,900 रुपये








