Gyanesh Upadhyay

अपने प्रधानमंत्री को कौन गालियां देता है? 

गालियां स्वभाव या संस्कार का हिस्सा हैं। हर कोई गाली नहीं दे सकता। जो लोग दूसरों के प्रति सद्भाव से भरे होते हैं, वो कभी गालियां नहीं देते हैं। जिनके पास सद्भाव नहीं होता, जिनके पास दूसरों के लिए प्रार्थनाएं नहीं होती हैं, जिनके पास दूसरों को देने के लिए कुछ नहीं होता है, उनकी …

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गायिका मैडोना की जिंदगी के कुछ पहलू

मैडोना पॉप गायिका व कलाकार वह एक ऐसा मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवार था, जिसमें बच्चे बड़े शरारती थे। बच्चों को न पिता टोकते थे और न मां डांटती थीं। उसी परिवार में एक बच्ची थी, जिसके दो बड़े भाई थे और दो छोटे भाई-बहन। अक्सर ऐसा होता है, मां-बाप सीधे हों, तो उनके बच्चे बहुत नाजायज …

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मकबूल शेरवानी की कुर्बानी हम कभी भूल नहीं पाएंगे

मकबूल शेरवानी शहीद सेनानी तब कश्मीर की खूबसूरत वादियों में भी भारत की आजादी की बयार बहने लगी थी। अपने रंगारंग खुशनुमा मुल्क के ख्वाब देखते उस नौजवान की रगों में वतन के लिए बेहिसाब मुहब्बत ठीक वैसे ही बहती थी, जैसे झेलम में पानी बहता है। बारामूला का वह नौजवान बहुत सजग था कि …

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लौह पुरुष तो एक ही थे सरदार वल्लभभाई पटेल

(सरदार वल्लभभाई पटेल, महान राजनेता की कहानी) छायादार पेड़ हो या इंसान, किसी एक दिशा में नहीं, अनेक दिशाओं में बढ़ता है। जो बाहर से कड़क लगता है, वह अंदर नरम भी हो सकता है। ऐसे सज्जन भी होते हैं, जो समय की नजाकत या जरूरत देखते हुए खुद को अंदर या बाहर से कभी …

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बिहार की पहचान बनाने वाले सच्चिदानंद सिन्हा

(संविधान निर्माता सच्चिदानंद सिन्हा की कहानी) यह भी गजब प्रदेश है, जिसकी पीठ में रीढ़ की तरह मैया गंगा गुजरती हैं। वह जैसे ही बिहार की माटी का स्पर्श करती हैं, कर्मनाशा और घाघरा आ मिलती हैं। उत्तर में हिमालय की ओर से आ रही गंडक , उसके बाद बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला, कोशी क्रमश: …

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वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत लिखने वाले के साथ क्या हुआ था?

(राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत की पृष्ठभूमि कैसे तैयार हुई, पढ़िए) बहुत मजबूरी के दिन थे। भारत में भी अंग्रेजों का यह गीत लोग गाने लगे थे, ‘भगवान हमारे दयालु राजा को बचाएं! / हमारे महान राजा अमर रहें!/ उसे विजयी बनाकर भेजें/ खुश और गौरवशाली/ हम …

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कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद को भूलते वाम दल

भारत में जब अच्छे छात्र नेताओं के नाम की चर्चा होती है, तब एक नाम कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद का जरूर आता है। कॉमरेड को शहीद हुए अब तीन दशक बीतने वाले हैं। साल 1997 में उनकी हत्या बिहार के शहर सिवान में सबसे मुख्य सड़क पर दिनदहाड़े हुई थी। जेन जी पीढ़ी उन्हें नहीं जानती …

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गालियां, गुंडे और स्याही की सियासत

यह बात वामपंथी भी मानते हैं और अपने मुखपत्रों में लिख-छाप चुके हैं कि ‘कॉकरोच इसलिए भी जीते, क्योंकि बदतमीज थे’। कॉमरेडों को शायद यह लगने लगा है कि बदजुबानी भी एक मुकम्मल जवाब हो सकती है। क्या गालियों की बौछार से सरकारों को डराया जा सकता है? शायद हां। दरअसल, सरकारी दफ्तरों में बैठे …

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गांधीजी के देश में इतनी गालियां?

कहा जाता है, जहां शब्द नाकाम हो जाते हैं, वहां गालियों की जरूरत पड़ती है। अच्छे लोगों के पास दूसरों को देने के लिए दुआएं होती हैं, पर कौन लोग हैं, जिनके पास दूसरों के लिए केवल गालियां होती हैं। दरअसल, जिसके पास या जिस समाज के पास जो चीज होगी, वह वही देगा। अगर …

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सीजेपी आंदोलन से हासिल 11 सबक

25 जुलाई की दोपहर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ी सांकेतिक सफलता है। हालांकि, इस सांकेतिक सफलता तक पहुंचने के क्रम में बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी चर्चा जरूर होनी चाहिए। इस आंदोलन से उपजी कुछ ऐसी बातें हैं, जिन पर ईमानदारी से सोचने की जरूरत है। हम किसी भी सुधार …

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