Gyanesh Upadhyay

कॉकरोचों के लिए स्वच्छ भारत-2 चाहिए

काॅकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता के पीछे भाजपा की बढ़ती अलोकप्रियता का भी कुछ हाथ है, पर भाजपा की शक्ति को कम करके नहीं देख सकते। सत्ता में किसी पार्टी की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, उसके विरोधियों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ती है। लोग जंतर-मंतर पर भीड़ देखकर चिंतित हैं। यह सोचने लगे …

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ईरान का शोक और रोष समझने की जरूरत

ईरान में मातम और नाराजगी का माहौल है। जहां, अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी अलविदा कहते हुए ईरानवासी रो रहे हैं, वहीं, नाराजगी उस अमेरिका पर है, जिसकी वजह से ईरान को ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं। तेहरान की गलियों में मातम का इजहार करने वालों का ऐसा सैलाब आया है …

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भिखारी बल : ओडिया भजन सम्राट

पुरी में जगन्नाथ मंदिर से बस एक जिला दूर गांव सोबाला है, जहां एक अबोध बालक स्थानीय नाटक या यात्रा मंडली में काम करता था। अक्सर बालिका का अभिनय करता। कभी कोई वाद्य बजाता, तो कभी कुछ गाने का मौका भी मिल जाता। एक दिन वह बहुत भाव से ओडिया गीत गा रहा था, भाव …

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तीजन बाई हमेशा याद रहेंगी

भारतीय लोक संस्कृति की एक मुखरतम कलाकार तीजन बाई की विदाई अपूरणीय क्षति है। लोक नाट्य की मनमोहक शैली पंडवानी ने अपना एक ऐसा रत्न खो दिया है, जिसकी ख्याति अपने देश में ही नहीं, पूरी कला दुनिया में थी। केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, भारत की भी अपनी एक पहचान खो गई है। एक कलाकार …

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नक्सलियों की कोई जरूरत नहीं

याद आ गया दंतेवाड़ा का गदापाल गांव छत्तीसगढ़ मुझे सदा से प्रिय रहा है। अति व्यस्त रही जिंदगी के बावजूद दो बार मुझे बस्तर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा जाने का मौका मिला है। दोनों ही बार जंगलों के बीच से सूनी सड़कों से गुजरते हुए एक भय बना रहता था। उन दिनों नक्सली अचानक ही सड़क पर …

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भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में क्या है?

समापन भाग भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा नाट्यशास्त्र आखिर जरूरी है? विशेष रूप से नाट्यशास्त्र का छठा और सातवां अध्याय बहुत काम का है और हमेशा काम का रहेगा। ये दो अध्याय ऐसे हैं, जो नाट्य समाज ही नहीं, सामान्य समाज के लोगों को भी अवश्य पढ़ना चाहिए। आज के सिनेमा प्रेमी समाज के …

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अभिनय के गुरु इब्राहिम अल्काजी

भाग – 3 भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा आधुनिक भारतीय अभिनय गुरु भारत के अपने सबसे बड़े दिग्गज नाट्यगुरु इब्राहिम अल्काजी भी लावस्की को ही मान्यता देते थे। लावस्की की अभिनय धारा में ही उन्होंने काम किया। यह बताते चलें कि सऊदी मूल से ताल्लुक रखने वाले इब्राहिम अल्काजी पुणे में जन्मे थे और …

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भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा

भाग – 2  नाट्यशास्त्र को क्यों भूल गए? शायद हमने आजादी मिलते ही यह तय कर लिया था कि हम ऋषि-मुनियों के लिखे शास्त्रों को कहीं नहीं पढ़ाएंगे। हमने यह मान लिया कि हमारे शास्त्रों में जो भी लिखा है, वह दकियानूसी है, हमारे काम का नहीं है। अपने शास्त्र से सैद्धांतिक और व्यावहारिक दूरी …

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भरतमुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा

ज्ञानेश उपाध्याय सिनेमा आज एक महा-विधा है, जिसमें कला, विज्ञान और वाणिज्य, तीनों अपनी पूरी व्यापकता के साथ निहित हैं। सिनेमा में जो कला है, उसमें भी अनेक कलाओं का समावेश है। उसके विज्ञान में भी अनेक विज्ञान शामिल हैं और हर सिनेमा में अनेक प्रकार के वाणिज्य भी जुड़े हुए हैं। विशालकाय दुनियादारी की …

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बाबासाहेब ने खींच दी लकीर भीमकाय

(संविधान विशेष – गणतंत्र दिवस) बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर संविधान निर्माता, समाज सुधारक बीसवीं सदी का दूसरा वर्ष चल रहा था। परीक्षाएं बीत गई थीं और गर्मी की छुट्टियां भी शुरू हो गई थीं। तीन बच्चे सतारा में अपने घर से पूरी तैयारी के साथ निकले थे, दो भाई और एक भतीजा, उनमें एक ही बच्चा …

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