Gyanesh Upadhyay

गालियां, गुंडे और स्याही की सियासत

यह बात वामपंथी भी मानते हैं और अपने मुखपत्रों में लिख-छाप चुके हैं कि ‘कॉकरोच इसलिए भी जीते, क्योंकि बदतमीज थे’। कॉमरेडों को शायद यह लगने लगा है कि बदजुबानी भी एक मुकम्मल जवाब हो सकती है। क्या गालियों की बौछार से सरकारों को डराया जा सकता है? शायद हां। दरअसल, सरकारी दफ्तरों में बैठे …

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गांधीजी के देश में इतनी गालियां?

कहा जाता है, जहां शब्द नाकाम हो जाते हैं, वहां गालियों की जरूरत पड़ती है। अच्छे लोगों के पास दूसरों को देने के लिए दुआएं होती हैं, पर कौन लोग हैं, जिनके पास दूसरों के लिए केवल गालियां होती हैं। दरअसल, जिसके पास या जिस समाज के पास जो चीज होगी, वह वही देगा। अगर …

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सीजेपी आंदोलन से हासिल 11 सबक

25 जुलाई की दोपहर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ी सांकेतिक सफलता है। हालांकि, इस सांकेतिक सफलता तक पहुंचने के क्रम में बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी चर्चा जरूर होनी चाहिए। इस आंदोलन से उपजी कुछ ऐसी बातें हैं, जिन पर ईमानदारी से सोचने की जरूरत है। हम किसी भी सुधार …

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कॉकरोचों के लिए स्वच्छ भारत-2 चाहिए

काॅकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता के पीछे भाजपा की बढ़ती अलोकप्रियता का भी कुछ हाथ है, पर भाजपा की शक्ति को कम करके नहीं देख सकते। सत्ता में किसी पार्टी की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, उसके विरोधियों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ती है। लोग जंतर-मंतर पर भीड़ देखकर चिंतित हैं। यह सोचने लगे …

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ईरान का शोक और रोष समझने की जरूरत

ईरान में मातम और नाराजगी का माहौल है। जहां, अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी अलविदा कहते हुए ईरानवासी रो रहे हैं, वहीं, नाराजगी उस अमेरिका पर है, जिसकी वजह से ईरान को ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं। तेहरान की गलियों में मातम का इजहार करने वालों का ऐसा सैलाब आया है …

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भिखारी बल : ओडिया भजन सम्राट

पुरी में जगन्नाथ मंदिर से बस एक जिला दूर गांव सोबाला है, जहां एक अबोध बालक स्थानीय नाटक या यात्रा मंडली में काम करता था। अक्सर बालिका का अभिनय करता। कभी कोई वाद्य बजाता, तो कभी कुछ गाने का मौका भी मिल जाता। एक दिन वह बहुत भाव से ओडिया गीत गा रहा था, भाव …

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तीजन बाई हमेशा याद रहेंगी

भारतीय लोक संस्कृति की एक मुखरतम कलाकार तीजन बाई की विदाई अपूरणीय क्षति है। लोक नाट्य की मनमोहक शैली पंडवानी ने अपना एक ऐसा रत्न खो दिया है, जिसकी ख्याति अपने देश में ही नहीं, पूरी कला दुनिया में थी। केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, भारत की भी अपनी एक पहचान खो गई है। एक कलाकार …

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नक्सलियों की कोई जरूरत नहीं

याद आ गया दंतेवाड़ा का गदापाल गांव छत्तीसगढ़ मुझे सदा से प्रिय रहा है। अति व्यस्त रही जिंदगी के बावजूद दो बार मुझे बस्तर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा जाने का मौका मिला है। दोनों ही बार जंगलों के बीच से सूनी सड़कों से गुजरते हुए एक भय बना रहता था। उन दिनों नक्सली अचानक ही सड़क पर …

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भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में क्या है?

समापन भाग भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा नाट्यशास्त्र आखिर जरूरी है? विशेष रूप से नाट्यशास्त्र का छठा और सातवां अध्याय बहुत काम का है और हमेशा काम का रहेगा। ये दो अध्याय ऐसे हैं, जो नाट्य समाज ही नहीं, सामान्य समाज के लोगों को भी अवश्य पढ़ना चाहिए। आज के सिनेमा प्रेमी समाज के …

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अभिनय के गुरु इब्राहिम अल्काजी

भाग – 3 भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा आधुनिक भारतीय अभिनय गुरु भारत के अपने सबसे बड़े दिग्गज नाट्यगुरु इब्राहिम अल्काजी भी लावस्की को ही मान्यता देते थे। लावस्की की अभिनय धारा में ही उन्होंने काम किया। यह बताते चलें कि सऊदी मूल से ताल्लुक रखने वाले इब्राहिम अल्काजी पुणे में जन्मे थे और …

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