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अपने प्रधानमंत्री को कौन गालियां देता है? 

गालियां स्वभाव या संस्कार का हिस्सा हैं। हर कोई गाली नहीं दे सकता। जो लोग दूसरों के प्रति सद्भाव से भरे होते हैं, वो कभी गालियां नहीं देते हैं। जिनके पास सद्भाव नहीं होता, जिनके पास दूसरों के लिए...

गायिका मैडोना की जिंदगी के कुछ पहलू

मैडोना पॉप गायिका व कलाकार वह एक ऐसा मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवार था, जिसमें बच्चे बड़े शरारती थे। बच्चों को न पिता टोकते थे और न मां डांटती थीं। उसी परिवार में एक बच्ची थी, जिसके दो बड़े भाई थे और दो...

मकबूल शेरवानी की कुर्बानी हम कभी भूल नहीं पाएंगे

मकबूल शेरवानी शहीद सेनानी तब कश्मीर की खूबसूरत वादियों में भी भारत की आजादी की बयार बहने लगी थी। अपने रंगारंग खुशनुमा मुल्क के ख्वाब देखते उस नौजवान की रगों में वतन के लिए बेहिसाब मुहब्बत ठीक वैसे ही...

लौह पुरुष तो एक ही थे सरदार वल्लभभाई पटेल

(सरदार वल्लभभाई पटेल, महान राजनेता की कहानी) छायादार पेड़ हो या इंसान, किसी एक दिशा में नहीं, अनेक दिशाओं में बढ़ता है। जो बाहर से कड़क लगता है, वह अंदर नरम भी हो सकता है। ऐसे सज्जन भी होते हैं, जो समय...

बिहार की पहचान बनाने वाले सच्चिदानंद सिन्हा

(संविधान निर्माता सच्चिदानंद सिन्हा की कहानी) यह भी गजब प्रदेश है, जिसकी पीठ में रीढ़ की तरह मैया गंगा गुजरती हैं। वह जैसे ही बिहार की माटी का स्पर्श करती हैं, कर्मनाशा और घाघरा आ मिलती हैं। उत्तर में...

वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत लिखने वाले के साथ क्या हुआ था?

(राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत की पृष्ठभूमि कैसे तैयार हुई, पढ़िए) बहुत मजबूरी के दिन थे। भारत में भी अंग्रेजों का यह गीत लोग गाने लगे थे, ‘भगवान हमारे दयालु...

कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद को भूलते वाम दल

भारत में जब अच्छे छात्र नेताओं के नाम की चर्चा होती है, तब एक नाम कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद का जरूर आता है। कॉमरेड को शहीद हुए अब तीन दशक बीतने वाले हैं। साल 1997 में उनकी हत्या बिहार के शहर सिवान में...

गालियां, गुंडे और स्याही की सियासत

यह बात वामपंथी भी मानते हैं और अपने मुखपत्रों में लिख-छाप चुके हैं कि ‘कॉकरोच इसलिए भी जीते, क्योंकि बदतमीज थे’। कॉमरेडों को शायद यह लगने लगा है कि बदजुबानी भी एक मुकम्मल जवाब हो सकती है। क्या गालियों...

गांधीजी के देश में इतनी गालियां?

कहा जाता है, जहां शब्द नाकाम हो जाते हैं, वहां गालियों की जरूरत पड़ती है। अच्छे लोगों के पास दूसरों को देने के लिए दुआएं होती हैं, पर कौन लोग हैं, जिनके पास दूसरों के लिए केवल गालियां होती हैं। दरअसल...

सीजेपी आंदोलन से हासिल 11 सबक

25 जुलाई की दोपहर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ी सांकेतिक सफलता है। हालांकि, इस सांकेतिक सफलता तक पहुंचने के क्रम में बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी चर्चा जरूर होनी चाहिए। इस...

कॉकरोचों के लिए स्वच्छ भारत-2 चाहिए

काॅकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता के पीछे भाजपा की बढ़ती अलोकप्रियता का भी कुछ हाथ है, पर भाजपा की शक्ति को कम करके नहीं देख सकते। सत्ता में किसी पार्टी की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती है, उसके विरोधियों की...

ईरान का शोक और रोष समझने की जरूरत

ईरान में मातम और नाराजगी का माहौल है। जहां, अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी अलविदा कहते हुए ईरानवासी रो रहे हैं, वहीं, नाराजगी उस अमेरिका पर है, जिसकी वजह से ईरान को ऐसे दिन देखने...

भिखारी बल : ओडिया भजन सम्राट

पुरी में जगन्नाथ मंदिर से बस एक जिला दूर गांव सोबाला है, जहां एक अबोध बालक स्थानीय नाटक या यात्रा मंडली में काम करता था। अक्सर बालिका का अभिनय करता। कभी कोई वाद्य बजाता, तो कभी कुछ गाने का मौका भी मिल...

तीजन बाई हमेशा याद रहेंगी

भारतीय लोक संस्कृति की एक मुखरतम कलाकार तीजन बाई की विदाई अपूरणीय क्षति है। लोक नाट्य की मनमोहक शैली पंडवानी ने अपना एक ऐसा रत्न खो दिया है, जिसकी ख्याति अपने देश में ही नहीं, पूरी कला दुनिया में थी।...

नक्सलियों की कोई जरूरत नहीं

याद आ गया दंतेवाड़ा का गदापाल गांव छत्तीसगढ़ मुझे सदा से प्रिय रहा है। अति व्यस्त रही जिंदगी के बावजूद दो बार मुझे बस्तर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा जाने का मौका मिला है। दोनों ही बार जंगलों के बीच से सूनी...

भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में क्या है?

समापन भाग भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा नाट्यशास्त्र आखिर जरूरी है? विशेष रूप से नाट्यशास्त्र का छठा और सातवां अध्याय बहुत काम का है और हमेशा काम का रहेगा। ये दो अध्याय ऐसे हैं, जो नाट्य समाज ही...

अभिनय के गुरु इब्राहिम अल्काजी

भाग – 3 भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा आधुनिक भारतीय अभिनय गुरु भारत के अपने सबसे बड़े दिग्गज नाट्यगुरु इब्राहिम अल्काजी भी लावस्की को ही मान्यता देते थे। लावस्की की अभिनय धारा में ही...

भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा

भाग – 2  नाट्यशास्त्र को क्यों भूल गए? शायद हमने आजादी मिलते ही यह तय कर लिया था कि हम ऋषि-मुनियों के लिखे शास्त्रों को कहीं नहीं पढ़ाएंगे। हमने यह मान लिया कि हमारे शास्त्रों में जो भी लिखा है...

भरतमुनि का नाट्यशास्त्र और सिनेमा

ज्ञानेश उपाध्याय सिनेमा आज एक महा-विधा है, जिसमें कला, विज्ञान और वाणिज्य, तीनों अपनी पूरी व्यापकता के साथ निहित हैं। सिनेमा में जो कला है, उसमें भी अनेक कलाओं का समावेश है। उसके विज्ञान में भी अनेक...

बाबासाहेब ने खींच दी लकीर भीमकाय

(संविधान विशेष – गणतंत्र दिवस) बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर संविधान निर्माता, समाज सुधारक बीसवीं सदी का दूसरा वर्ष चल रहा था। परीक्षाएं बीत गई थीं और गर्मी की छुट्टियां भी शुरू हो गई थीं। तीन बच्चे...