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सज्जन, स्तानिस्लावस्की और भरतमुनि, इन तीनों विभूतियों की याद लगभग एक साथ ही आती है। सज्जन का जन्म 15 जनवरी और स्तानिस्लावस्की का जन्म 17 जनवरी और क्या पता भरतमुनि का जन्म भी आसपास ही हुआ हो। इन तीनों...
उपक्रम आदर्श स्थिति में जब किसी लेख या फीचर की शुरुआत होती है, तो उसका एक आकर्षक और सटीक शीर्षक चुना जाता है, जो लक्षित विषय या मुद्दे के अनुकूल होता है। आम तौर पर लिखने की मानसिक तैयारी के दौरान ही...
उस दोपहर रायपुर के बूढ़ापारा में उस मकान को खोज रहा हूं, जहां कभी रहते थे किशोर विवेकानंद अर्थात नरेंद्र नाथ। उस सरोवर से पैदल चलते हुए उनकी गली में पहुंचा हूं, जहां कभी वह रोज नहाते थे। सरोवर पर भी...
कभी मत भूलिए, अगर आप अपने पहले ही वाक्य से पाठक के दिमाग पर असर नहीं डालते हैं, तो दूसरा वाक्य लिखने की कोई जरूरत नहीं है। – आर्थर ब्रिसबन अगर भारत में अच्छे लेखकों का टोटा नहीं है, तो बुरा...
इतना बड़ा सितारा, इतनी लंबी उम्र और इतनी कम फिल्में, यह बात अपने आप ही दिलीप कुमार को फिल्म दुनिया में सदा-सर्वदा तक सबसे अलग साबित करती रहेगी। फिल्मों में सक्रियता के 54 साल में कुल 62 फिल्में...
खबर काटने में असावधानी जल्दीबादी में कई खबरें स्थानाभाव में वहां से काट दी जाती हैं, जहां उनका कोई वाक्य पूरा हो रहा हो। कई बार खबर का महत्वपूर्ण हिस्सा ही कट जाता है, मूल बात ही कट जाती है। यह...
‘पठान’ फिल्म का यह गीत नकारात्मक, लेकिन शायद व्यावहारिक भाव लिए हुए दिल में कहीं चुभता है। यह गीत राजनीतिक और नैतिक रूप से गलत है, लेकिन यह हमारे दौर का सच भी है। यह बेशरम होते लोगों का दौर है, जहां...
प्रूफ की समस्या पत्रकारिता में प्रूफ की समस्या शास्वत है। प्रूफ की गलती तब भी होती थी, जब प्रूफ के अलग विभाग हुआ करता था और अब भी होती है। अब प्रूफ का काम भी सम्पादकों के जिम्मे आ गया है। सम्पादकों...
(प्यारे साथी अमलेंदु के लिए) हमने जीया है गले तक बहता बारिश भर प्यार। हरियाये पहाड़ों के रोमछिद्रों से उमड़ते, उतरते बहते बादल कभी गले से नथुने तक। मां की तरह रंगबिरंगी छोटी-छोटी नावों के ख्वाब दिखाकर...
योजना में कमी सम्पादन में योजना की बड़ी अहमियत होती है। कार्य या पृष्ठ की योजना या जरूरत को ध्यान में रखे बिना समाचार या विचार के सम्पादन की जल्दी कई बार खराब रूप में सामने आती है। आजकल पैकेज तैयार...
एक रिपोर्टिंग – एक कहानी नकली हर जगह हावी है। असली के ठीक बगल में नकली, मतलब सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। एक कदम धीमे चलकर ल्हासा कहां लिखा है, खोजता हूं और पा जाता हूं। उधर बढ़ता हूं, जहां एक...
पत्रकारिता की क्लास – सम्पादन का विज्ञान दिमाग पैराशूट की तरह होता है, तभी काम करता है, जब खुला होता है। अगर रिपोर्टर पत्रकारिता रूपी रथ के अश्व हैं, तो सम्पादन से जुड़े पत्रकार लगाम और सारथी।...
साक्षात्कार / अडूर गोपालकृष्णन / फिल्मकार भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहेब फाल्के से सम्मानित अडूर गोपालकृष्णन दुनिया के बेहतरीन फिल्म निर्देशकों में शुमार हैं। इनकी पहली फीचर फिल्म...
(आज जो लोग व्लादिमीर पुतिन का रूस देख रहे हैं, उन्हें जरूर जानना चाहिए कि गोर्वाच्योफ के समय रूस या सोवियत संघ कैसा था ? जमीन आसमान का अंतर आ गया है। यहां उनके जीवन की एक कथा पेश है।) नाना कैद से...
वह संगीत में और संगीत उसमें बसता था। पिता सितार बजाते थे, तो उसके दिलो-दिमाग के तार बज उठते थे- सा रे ग म प ध नि सां…। इस आरोह में एक लहर सी उठती थी और फिर अवरोह पर आती थी- सां नि ध प म ग रे...
अकीरा कुरोसावा ,मशहूर जापानी फिल्मकार आपदाएं सिर्फ बाहरी दुनिया में ही नहीं, मन में कहीं गहरे भी घटित होती हैं। हाहाकार सिर्फ ऊपर-बाहर से ही नहीं गुजर जाता, कहीं अंदर भी रगों में बहने लगता है। जो...
अडूर गोपालकृष्णन, मशहूर फिल्मकार बादल जब अपने भारत आगमन का बिगुल बजा देते हैं, तब सबको पता है, वे आएंगे और सबसे पहले केरल को नहलाएंगे। ठीक पचास साल पहले भी यही सब हो रहा था, लेकिन उसी समय केरल में एक...
(जितना मैं समझ पाया हूं, उतना पेश हैयह टिप्पणी तब लिखी गई थी जब शाहबाज कलंदर की दरगाह पर हमला हुआ था ) वे भटके हुए लोग सदियों से चीख रहे हैं कि खुद को सूफी संत कहकर पूजा-आराधना लेने वाले शैतान के नबी...