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(आज जो लोग व्लादिमीर पुतिन का रूस देख रहे हैं, उन्हें जरूर जानना चाहिए कि गोर्वाच्योफ के समय रूस या सोवियत संघ कैसा था ? जमीन आसमान का अंतर आ गया है। यहां उनके जीवन की एक कथा पेश है।) नाना कैद से...
वह संगीत में और संगीत उसमें बसता था। पिता सितार बजाते थे, तो उसके दिलो-दिमाग के तार बज उठते थे- सा रे ग म प ध नि सां…। इस आरोह में एक लहर सी उठती थी और फिर अवरोह पर आती थी- सां नि ध प म ग रे...
अकीरा कुरोसावा ,मशहूर जापानी फिल्मकार आपदाएं सिर्फ बाहरी दुनिया में ही नहीं, मन में कहीं गहरे भी घटित होती हैं। हाहाकार सिर्फ ऊपर-बाहर से ही नहीं गुजर जाता, कहीं अंदर भी रगों में बहने लगता है। जो...
अडूर गोपालकृष्णन, मशहूर फिल्मकार बादल जब अपने भारत आगमन का बिगुल बजा देते हैं, तब सबको पता है, वे आएंगे और सबसे पहले केरल को नहलाएंगे। ठीक पचास साल पहले भी यही सब हो रहा था, लेकिन उसी समय केरल में एक...
(जितना मैं समझ पाया हूं, उतना पेश हैयह टिप्पणी तब लिखी गई थी जब शाहबाज कलंदर की दरगाह पर हमला हुआ था ) वे भटके हुए लोग सदियों से चीख रहे हैं कि खुद को सूफी संत कहकर पूजा-आराधना लेने वाले शैतान के नबी...