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हमारी सबसे बड़ी लड़ाई झूठ से है

सत्यं वद, धर्मं चर के जयघोष के बावजूद संसार का क्या हाल है? कितने लोग सत्य के दीपक जलाए हुए हैं? भारत की ही बात करें, तो यहां 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास सोशल मीडिया की पहुंच है और सोशल मीडिया पर कम से कम 37 प्रतिशत सूचनाएं झूठी होती हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट …

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गांधी जी के चार पुत्रों का जीवन कैसा रहा?

बापू का जीवन एक तरह से प्रयोग था, इसमें उन्हें बड़ी सफलताएं मिलीं, तो कुछ अफसोस भी रह गए। विशेष रूप से उन्होंने अपने परिवार को जिस तरह से आगे बढ़ाया, उसे लेकर स्वयं उनके पुत्रों में असंतोष रहा। किसी भी पुत्र को औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं हुई और उनके लिए घर में ही पढ़ने …

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अंडभक्त बनाम लिब्रांडु विमर्श के समय

दुनिया में राजनीतिक इंफ्लुएंसर की संख्या बढ़ती जा रही है और इस मोर्चे पर भारत किसी भी दूसरे देश से आगे है। भारत जितनी ही आबादी वाले देश चीन में राजनीतिक इंफ्लुएंसर प्रजाति के सोशल मीडिया मुगल मुमकिन नहीं हैं। चीन पर विस्तार से बात करने की जरूरत है, लेकिन पहले भारत की बात। भारत …

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अपने प्रधानमंत्री को कौन गालियां देता है? 

गालियां स्वभाव या संस्कार का हिस्सा हैं। हर कोई गाली नहीं दे सकता। जो लोग दूसरों के प्रति सद्भाव से भरे होते हैं, वो कभी गालियां नहीं देते हैं। जिनके पास सद्भाव नहीं होता, जिनके पास दूसरों के लिए प्रार्थनाएं नहीं होती हैं, जिनके पास दूसरों को देने के लिए कुछ नहीं होता है, उनकी …

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गायिका मैडोना की जिंदगी के कुछ पहलू

मैडोना पॉप गायिका व कलाकार वह एक ऐसा मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवार था, जिसमें बच्चे बड़े शरारती थे। बच्चों को न पिता टोकते थे और न मां डांटती थीं। उसी परिवार में एक बच्ची थी, जिसके दो बड़े भाई थे और दो छोटे भाई-बहन। अक्सर ऐसा होता है, मां-बाप सीधे हों, तो उनके बच्चे बहुत नाजायज …

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मकबूल शेरवानी की कुर्बानी हम कभी भूल नहीं पाएंगे

मकबूल शेरवानी शहीद सेनानी तब कश्मीर की खूबसूरत वादियों में भी भारत की आजादी की बयार बहने लगी थी। अपने रंगारंग खुशनुमा मुल्क के ख्वाब देखते उस नौजवान की रगों में वतन के लिए बेहिसाब मुहब्बत ठीक वैसे ही बहती थी, जैसे झेलम में पानी बहता है। बारामूला का वह नौजवान बहुत सजग था कि …

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लौह पुरुष तो एक ही थे सरदार वल्लभभाई पटेल

(सरदार वल्लभभाई पटेल, महान राजनेता की कहानी) छायादार पेड़ हो या इंसान, किसी एक दिशा में नहीं, अनेक दिशाओं में बढ़ता है। जो बाहर से कड़क लगता है, वह अंदर नरम भी हो सकता है। ऐसे सज्जन भी होते हैं, जो समय की नजाकत या जरूरत देखते हुए खुद को अंदर या बाहर से कभी …

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बिहार की पहचान बनाने वाले सच्चिदानंद सिन्हा

(संविधान निर्माता सच्चिदानंद सिन्हा की कहानी) यह भी गजब प्रदेश है, जिसकी पीठ में रीढ़ की तरह मैया गंगा गुजरती हैं। वह जैसे ही बिहार की माटी का स्पर्श करती हैं, कर्मनाशा और घाघरा आ मिलती हैं। उत्तर में हिमालय की ओर से आ रही गंडक , उसके बाद बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला, कोशी क्रमश: …

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वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत लिखने वाले के साथ क्या हुआ था?

(राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत की पृष्ठभूमि कैसे तैयार हुई, पढ़िए) बहुत मजबूरी के दिन थे। भारत में भी अंग्रेजों का यह गीत लोग गाने लगे थे, ‘भगवान हमारे दयालु राजा को बचाएं! / हमारे महान राजा अमर रहें!/ उसे विजयी बनाकर भेजें/ खुश और गौरवशाली/ हम …

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कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद को भूलते वाम दल

भारत में जब अच्छे छात्र नेताओं के नाम की चर्चा होती है, तब एक नाम कॉमरेड चंद्रशेखर प्रसाद का जरूर आता है। कॉमरेड को शहीद हुए अब तीन दशक बीतने वाले हैं। साल 1997 में उनकी हत्या बिहार के शहर सिवान में सबसे मुख्य सड़क पर दिनदहाड़े हुई थी। जेन जी पीढ़ी उन्हें नहीं जानती …

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