Blog

अच्छा कैसे लिखा जाए?-3

अभ्यास  हर लिखने वाले को अभ्यास जरूर करना चाहिए। अभ्यास से ही लेखनी में धार पैदा होती है। जैसे तैरने के अभ्यास के बिना आदमी नदी में डूब सकता है, ठीक वैसे ही अभ्यास के अभाव में लेखक लिखते हुए पिट सकता है। अभ्यास का मतलब यह नहीं, गलत अभ्यास किए जा रहे हैं और …

अच्छा कैसे लिखा जाए?-3 Read More »

मनोज तिवारी बनाम रवि किशन

भोजपुरी फिल्म उद्योग में बहुत गड़बड़ झाला है। यह उद्योग करीब 2,000 करोड़ रुपये का माना जाता है। वैसे यह मंजिल भोजपुरी फिल्मों को साल 2017 में ही मिल गई थी, लेकिन तब से कमाई लगभग ठहर गई है। फिल्में खूब बन रही हैं, लेकिन लागत निकालने के आगे मामला बन नहीं पा रहा है। …

मनोज तिवारी बनाम रवि किशन Read More »

बजाज और बिड़ला ने मिलकर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को कैसे बचाया?

प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई, बिहार में स्थित उनका पुश्तैनी मकान आज अगर शान से खड़ा है, तो इसमें बजाज और बिड़ला जैसे उदार राष्ट्र प्रेमी सेठों का बड़ा हाथ है। विशेष रूप से जमनालाल बजाज जी का योगदान सर्वाधिक है और राजेंद्र प्रसाद को कष्टों से उबारने के लिए कभी महीनों …

बजाज और बिड़ला ने मिलकर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को कैसे बचाया? Read More »

सज्जन की याद

सज्जन, स्तानिस्लावस्की और भरतमुनि, इन तीनों विभूतियों की याद लगभग एक साथ ही आती है। सज्जन का जन्म 15 जनवरी और स्तानिस्लावस्की का जन्म 17 जनवरी और क्या पता भरतमुनि का जन्म भी आसपास ही हुआ हो। इन तीनों में एक बात आम है और वह है अभिनय। सज्जन अर्थात सज्जनलाल पुरोहित, भारत के एक …

सज्जन की याद Read More »

अच्छा कैसे लिखा जाए?-2

उपक्रम आदर्श स्थिति में जब किसी लेख या फीचर की शुरुआत होती है, तो उसका एक आकर्षक और सटीक शीर्षक चुना जाता है, जो लक्षित विषय या मुद्दे के अनुकूल होता है। आम तौर पर लिखने की मानसिक तैयारी के दौरान ही शीर्षक तय कर लेना चाहिए, लेकिन कई बार शुरू में शीर्षक तय नहीं …

अच्छा कैसे लिखा जाए?-2 Read More »

यहां दो साल रहे थे स्वामी विवेकानंद

उस दोपहर रायपुर के बूढ़ापारा में उस मकान को खोज रहा हूं, जहां कभी रहते थे किशोर विवेकानंद अर्थात नरेंद्र नाथ। उस सरोवर से पैदल चलते हुए उनकी गली में पहुंचा हूं, जहां कभी वह रोज नहाते थे। सरोवर पर भी प्यार उमड़ रहा है और उस गली पर भी। हालांकि, घर वाली गली में …

यहां दो साल रहे थे स्वामी विवेकानंद Read More »

अच्छा कैसे लिखा जाए?

कभी मत भूलिए, अगर आप अपने पहले ही वाक्य से पाठक के दिमाग पर असर नहीं डालते हैं, तो दूसरा वाक्य लिखने की कोई जरूरत नहीं है। – आर्थर ब्रिसबन अगर भारत में अच्छे लेखकों का टोटा नहीं है, तो बुरा लिखने वालों की भी गिनती कम नहीं है। अच्छा लिखना तो अलग बात है, …

अच्छा कैसे लिखा जाए? Read More »

दिलीप कुमार का मतलब

 इतना बड़ा सितारा, इतनी लंबी उम्र और इतनी कम फिल्में, यह बात अपने आप ही दिलीप कुमार को फिल्म दुनिया में सदा-सर्वदा तक सबसे अलग साबित करती रहेगी। फिल्मों में सक्रियता के 54 साल में कुल 62 फिल्में, जिनमें से 57 फिल्में प्रदर्शित-प्रशंसित हैं। उनकी करीब 12 फिल्में अपूर्ण रहीं या प्रदर्शित नहीं हो पाईं। …

दिलीप कुमार का मतलब Read More »

संपादन की समस्या और समाधान-4

खबर काटने में असावधानी जल्दीबादी में कई खबरें स्थानाभाव में वहां से काट दी जाती हैं, जहां उनका कोई वाक्य पूरा हो रहा हो। कई बार खबर का महत्वपूर्ण हिस्सा ही कट जाता है, मूल बात ही कट जाती है। यह असावधानी इसलिए होती है, क्योंकि सम्पादन डेस्क सम्पादन के समय पृष्ठ पर उस खबर …

संपादन की समस्या और समाधान-4 Read More »

बेशरम रंग का मतलब

‘पठान’ फिल्म का यह गीत नकारात्मक, लेकिन शायद व्यावहारिक भाव लिए हुए दिल में कहीं चुभता है। यह गीत राजनीतिक और नैतिक रूप से गलत है, लेकिन यह हमारे दौर का सच भी है। यह बेशरम होते लोगों का दौर है, जहां असंख्य लोग अब दावा करने लगे हैं कि हम बुरे ही सही हैं। …

बेशरम रंग का मतलब Read More »