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जोधपुर जफर बिना… जंचै ई कोनी

जफर खान सिंधी को श्रद्धा अर्पित आजकल कुछ ऐसे लोग गए हैं, जो मेरे अंदर से भी कुछ ऐसा ले गए हैं कि शब्द कम पड़ने लगे हैं। लिखने के लिए कलम की नीब को ठोस होना पड़ता है, पर जब नीब ही पिघलने लगे, तो क्या कैसे लिखा जाए…। बीते सप्ताह जफर खान सिंधी …

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यह गुलमोहर शर्मिला नहीं है

भाग – एक गुलमोहर फिल्म कुछ दिन पहले ही देख लिया था। चकित था, बहुत दिनों बाद एक ऐसी आधुनिक, पारिवारिक और मनोरंजक फिल्म आई है। फिर एक दिन सुबह प्रिय माननीय वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण जी का एक संदेश आया, ‘देखिए, गुलमोहर, मैंने भी एक छोटा सा काम किया है, पार्क में शर्मिला जी …

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अच्छा कैसे लिखा जाए – 7

लेखन व लेखकों से जुड़ी नकारात्मक प्रवृत्तियां अखबारों में लिखने वालों से जुड़ी अनेक तरह की नकारात्मक प्रवृत्तियां यदा-कदा नजर आ जाती हैं, जिससे पत्रकारिता के संपूर्ण न हो पाने का अहसास गाढ़ा हो जाता है। लेखकों को जागरूक और अच्छा इंसान माना जाता है, इसलिए उनसे उम्मीदें भी बहुत होती हैं, लेकिन ज्यादातर वे …

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एक प्यारे साथी को पाने की जंग

सिलवेस्टर स्टेलौन, विश्व प्रसिद्ध अभिनेता, फिल्मकार बेशक, जिंदगी इम्तहान लेती है। नौबत ही ऐसी आ गई थी कि जिंदगी एक दड़बे में बसर करनी पड़ रही थी। कभी भोजन तलाशते-तलाशते रात हो जाती, तो कभी पेट समेटे इस उम्मीद में सोते कि चलो, सुबह कोई न कोई जुगाड़ हो ही जाएगा। हॉलीवुड में जगह बनाने …

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अच्छा कैसे लिखा जाए – 6

भारत की दरिद्रता भारत में समाचार संस्थान लिखने वालों को उतना पारिश्रमिक नहीं दे पाते हैं, जिनसे लेखक का काम चल जाए। ज्यादातर हिन्दी व भाषायी अखबारों में मानदेय इतना कम है कि अच्छे लेखकों के मान-सम्मान पर चोट पहुंचती है। अखबार कहां से कहां पहुंच गए, लेकिन दो बातें नहीं बदली हैं। एक तो …

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हिम्मत है तो चल मार के दिखा

सैम मानेकशॉ, भारत के पहले फील्ड मार्शल वह नाराज सैनिक जोर से चीखा था, ‘कंपनी कमांडर को मार डालूंगा।’ यह बात उस सैन्य कंपनी के शिविर में आग की तरह फैल गई थी। मात्र पदोन्नत न होने पर इतनी अनुशासनहीनता? तुरंत उस सैनिक को निगरानी में ले लिया गया। बर्मा के मोर्चे पर युद्ध के …

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अच्छा कैसे लिखा जाए – 5

समाचार, टिप्पणी, लेख और फीचर समाचार टिप्पणी, लेख और फीचर अलग-अलग लेखन सामग्री है। इन्हीं चारों की सर्वाधिक जरूरत समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में पड़ती है। इन तीनों को लिखने का अभ्यास शुरू में ही कर लेना चाहिए। अभ्यास के अभाव की वजह से ही समाचार लिखने वाले ज्यादातर पत्रकार लेख लिखने या फीचर लिखने में …

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‘अर्जेंटीना, 1985’ फिल्म और भारत में आपातकाल

‘अर्जेंटीना, 1985’ हमारे दौर की एक बेहतरीन फिल्म है। इसी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म का गोल्डन ग्लोब अवार्ड मिला है। यह वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म है। अर्जेंटीना देश में अंतिम नागरिक-सैन्य तानाशाही (1976-1983) चलाने वाले सरगनाओं पर शिकंजा कसने के कानूनी अभियान की प्रस्तुति है ‘अर्जेंटीना, 1985’। सैन्य जनरलों ने कथित बागियों को …

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अच्छा कैसे लिखा जाए?-4

अपूर्वता नयापन बहुत जरूरी है। अगर एक ही विषय पर एक ही तरह की बात बार-बार लिखी जाए, तो यह अच्छे लेखक की निशानी नहीं है। ध्यान रहे, जो लिखा जा रहा है, वह नया होना चाहिए। वह लेखक जिसके पास लिखने के लिए कुछ नया नहीं है, वह अच्छा नहीं लिख सकता। अच्छा लेखक …

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अभिनय के आधुनिक गुरु – स्टैनिस्लावस्की

उस बच्चे को बहुत पुचकारकर तैयार किया गया था। न केवल मंच पर पहली बार उतारा गया था, बल्कि एक जगह बैठा भी दिया गया था कि उछल-कूद की जरूरत न पड़े। अभिनय के लिए बहुत गुंजाइश नहीं थी। मंच को रुई से ढक दिया गया था। बीच में कुछ सदाबहार हरियाली थी, उस पर …

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