उपक्रम
आदर्श स्थिति में जब किसी लेख या फीचर की शुरुआत होती है, तो उसका एक आकर्षक और सटीक शीर्षक चुना जाता है, जो लक्षित विषय या मुद्दे के अनुकूल होता है। आम तौर पर लिखने की मानसिक तैयारी के दौरान ही शीर्षक तय कर लेना चाहिए, लेकिन कई बार शुरू में शीर्षक तय नहीं हो पाता है, लेख लिखने के दौरान या लेख लिखे जाने के उपरांत वह बनता है।
लेख की शुरुआत करते समय पूरी तैयारी होनी चाहिए। तैयारी का मतलब उस लक्षित विषय या मुद्दे के बारे में पूरी जानकारी जुटानी चाहिए और तभी शानदार शुरुआत करनी चाहिए। कमजोर शुरुआत करके किसी लेख या फीचर को अच्छी तरह से जमाया नहीं जा सकता। कमजोर शुरुआत से लेख बिखर जाता है या अपने लक्ष्य से भटक जाता है। अतः शुरुआत बड़ी शानदार होनी चाहिए। अच्छी शुरुआत की कई अच्छी-अच्छी स्थापित शैलियां हैं, जिनका लाभ उठाना चाहिए। शीर्षक अच्छा हो और लेख या फीचर की शुरुआत अच्छी हो, तो पाठक भी पढ़ने के लिए लालायित होता है।
उपसंहार
अच्छे लेख या फीचर का आकार जरूरत के लिहाज से ही होना चाहिए। विषय के बारे में कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा जानकारी रोचकता को बरकरार रखते हुए देनी चाहिए। कम शब्दों का मतलब यह नहीं कि वाक्यों को सूचनाओं या विचारों से बोझिल बना दिया जाए। अपने विषय की विवेचना पूरे मनोयोग से अच्छी भाषा और शैली में करनी चाहिए। विषय को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा नहीं कि कोई बड़ी जरूरी बात लिखी जाने से रह जाए। जो भी जरूरी है, लिखा जाना चाहिए। अपनी बात को एक माकूल मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि पाठकों को किसी तरह के अधूरेपन का अहसास न हो। अच्छा लेख वह है, जो पाठक के सामने सवाल खड़े करता है, जवाब देता है, सहयोग भी करता है और जवाब तलाशने के लिए प्रेरित भी करता है।
अकसर ऐसा होता है, कई लोग उपक्रम ठीक करते हैं, लेकिन उपसंहार में कमी छोड़ देते हैं। इससे लेख बनते-बनते बिगड़ जाता है। मुख्य बात उभरकर ठीक से सामने नहीं आ पाती है।








