Gyanesh Upadhyay

रोहित शर्मा बनाम हार्दिक पांड्या!

रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की तुलना व्यर्थ है, पर मुंबई इंडियन टीम की कप्तानी से जिस तरह से रोहित शर्मा को हटाकर हार्दिक को कप्तान बनाया गया है, उससे क्रिकेट की दुनिया को हमेशा के लिए एक विवाद मिल गया है। कप्तानी से हटाए जाने के बावजूद रोहित शर्मा अच्छा खेल रहे हैं, जबकि …

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कुमार शहानी और मणि कौल का महत्व

सिनेमा के विशाल घर में भी पूजा या इबादत का एक कोना है, जहां बेहतर इंसान होना बुनियादी शर्त है। अगर आप जगे हुए इंसान नहीं हैं, तो इस पवित्र कोने पर आपकी नजर ही नहीं पड़ेगी। बेशक, बहुत सा सिनेमा सिर्फ दिखावा या शो-बाजी है। कुछ ही सिनेमा प्रेम या हृदय तक पहुंचता है …

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पुरानी डायरी के कुछ पन्ने -1

मंदिर, शीतलपुर बाजार, Sheetalpur Bazar, ब्लॉक मांझी, जिला – सारण, बिहार (साल 2008 का लिखा हुआ) जाति कहीं हमारे संस्कारों में शामिल है, लेकिन मैंने ईमानदार आत्मसमीक्षा के बाद यह महसूस किया है कि मेरे दिल में भी जाति के कुछ जर्रे विद्यमान हैं, हालांकि वे प्रभावी कभी नहीं रहे। जब वे जर्रे जोर मारते …

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यूसुफ खान मतलब दिलीप कुमार

दिलीप कुमार पाकिस्तान में भी बहुत लोकप्रिय हैं, पाकिस्तान के दर्शक भी उन्हें अपना कलाकार मानते हैं। पाकिस्तान की धरती और वहां के लोगों के प्रति दिलीप कुमार ने हमेशा प्रेम दर्शाया है। वे कभी भूल नहीं पाए कि वे भी पाकिस्तानी जमीन – पेशावर से भारत आए थे और पूरे होशो-हवाश में आए थे। …

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मैं राधा बन जाऊं और तुम कृष्ण

उदय शंकर, महान भारतीय नर्तक कहा जाता है, बिना डूबे मोती हासिल नहीं होता। वह युवा भी अपने हिस्से के मोती की खोज में लगा था। कला दुनिया में ही रहता था, लंदन में रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट में शिक्षा ले रहा था। मन में भारत बसा था, वह कला समृद्ध भारत, जिसके एक हाथ …

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एक नाच हुआ करता था

मेरी 13 साल पुरानी रिपोर्ट मैं लौंडे की बात करने वाला हूँ , माफ कीजिएगा, मैं कोई अश्लील टिप्पणी नहीं करूंगा। जो लोग बिहार की नाट्य शैली नाच को जानते हैं, उनके लिए लौंडा वह है, जो स्त्री पोशाक पहनकर नाचता है, स्त्रियों की तरह स्वांग रचता है। बचपन में साल १९७८-७९ में कुल जमा …

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अच्छे समाज को ही अच्छा सिनेमा देखने का अधिकार

(आदिपुरुष के बहाने दक्षिण और भक्ति) भारत में सनातन की भौतिक बुनियाद भले उत्तर में मजबूत हो, पर धर्म का संचालन दक्षिण से ही होता आया है। आदि शंकराचार्य केरल से आए थे, रामानुजाचार्य तमिलनाडु से और रामानंदाचार्य जी का अवतरण भले ही प्रयागराज में हुआ, पर यह बार-बार दोहराया जाता है कि भक्ति द्राविड़ …

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एक मनोज वाजपेयी काफी हैं

फिल्म ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ आम लोगों के खास संघर्ष की बेमिसाल कहानी है। अब तक जो बायोपिक फिल्में बनी हैं, उनमें यह एक बेहतरीन पेशकश है। गाजे-बाजे, तामझाम, बनावटीपन से दूर रहते हुए भी यह फिल्म दर्शकों को बांधे रहती है। जब आप समाज के किसी सच को बिना-लाग लपेट उठाते हैं, तो …

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हृदय वही, जो कोमल है

दिलीप कुमार उपाध्याय (मेरे बड़े भैया की कलम से) दशरथनंदन श्रीराम के प्रति आदर्श भक्ति के बारे में यों तो श्रीमद् गोस्वामी तुलसीदास के साथ-साथ अन्य पूर्ववर्ती और परावर्ती भगवत भक्तों और महामुनियों तथा मनस्वियों ने विभिन्न प्रकार के पहलुओं को प्रमाणित तथा चरितार्थ किया है तथा नवधा भक्ति को सर्वसमर्थ और प्रासंगिक तथा प्रामाणिक …

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क्रोध का इतिहास : शिव, परशुराम और एंग्री यंगमैन

(अपनी पुस्तक ‘ सिनेमा हिन्दुस्तानी’ के अमिताभ बच्चन पर केंद्रित अध्याय ‘हम जहां खड़े हो जाते हैं’ से) अभिनय की दुनिया में अमिताभ बच्चन को उनके गुस्से के लिए ही ज्यादा जाना जाता है। गुस्सा अर्थात क्रोध अर्थात रौद्र। भारतीय शास्त्र में महादेव शिव को रुद्र कहा जाता है। शिव का क्रोध, शिव का तीसरा …

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