मैडोना
पॉप गायिका व कलाकार
वह एक ऐसा मध्यवर्गीय अमेरिकी परिवार था, जिसमें बच्चे बड़े शरारती थे। बच्चों को न पिता टोकते थे और न मां डांटती थीं। उसी परिवार में एक बच्ची थी, जिसके दो बड़े भाई थे और दो छोटे भाई-बहन। अक्सर ऐसा होता है, मां-बाप सीधे हों, तो उनके बच्चे बहुत नाजायज हरकतों को अंजाम देते हैं।
जाहिर है, बच्चों की शरारतों का बोझ मां उठाती थीं। बच्चे गंदगी करते चलते और मां पीछे-पीछे साफ करती चलती थीं। वह बच्ची भी मनमानियों से मां को परेशान किया करती थी। उसे पता था कि मां को गंभीर बीमारी है। मां काम करते-करते थकने लगी हैं। एक दिन मां काम करते-करते थककर सोफे पर बैठी थीं और वह बच्ची अपनी जिद्द लिए पहुंच गई, ‘मां, चलो मेरे साथ खेलो।’ मां ने मना किया, पर बच्ची अड़ गई, ‘चलो खेलो, जैसे पहले खेलती थी।’ मां ने फिर मना किया, तो बच्ची उनकी पीठ पर चढ़कर हठ करने लगी। मां टस से मस नहीं हुईं। बच्ची ने गुस्से में मां की पीठ पर मुट्ठी से मारा, पर मां ने कुछ नहीं कहा।
तब बच्ची ने गौर किया कि मां रो रही हैं। बच्ची के भाव अचानक बदल गए। उसने मां को अपनी बांहों में भर लिया और उन्हें सिसकती हुई महसूस करने लगी। बच्ची को लगा कि मानो, उसकी मां ही छोटी बच्ची बन गई हो। भावनाओं का ज्वार उठा और बच्ची में न जाने कहां से परिपक्वता उमड़ आई। उसने मन ही मन में ठान लिया कि अब मां को कभी सताना नहीं है। ऐसा नहीं है कि उस दिन के बाद से वह बच्ची दुखी, कमजोर या बेबस हो गई। उसने सिर्फ यह फैसला किया कि अब से वह सामने आने वाले तमाम हालात को खुद अपने काबू में रखेगी और हर चीज अपने दम पर ठीक करने की कोशिश करेगी।
बच्ची ने मां को बार-बार अस्पताल में देखा। पिता को रोते-सिसकते देख कई बार टूटने को हुई, पर खुद को संभाला। कभी हमेशा खिलखिलाने और दूसरों को हंसाते रहने वाली मां खामोश होती चली गईं। बच्ची के दिल में दर्द का यह सिलसिला दर्ज होता चला गया। एक दिन मां ने खाने के लिए हैमबर्गर मांगा था, लेकिन उन्हें पता था कि वह खा नहीं पाएंगी। फिर भी बहुत दिनों से भूखी मां के मन में यह एक आखिरी इच्छा थी और न जाने कितनी अन्य इच्छाएं लिए मां हमेशा के लिए विदा हो गईं।
तब अनाथ हुई उस बच्ची की उम्र का महज छठा वर्ष चल रहा था और वह घर की बड़ी बहन या बेटी थी, तो अपने छोटे भाई-बहन की मां की भूमिका निभाने के लिए मजबूर होने लगी। वह समझ गई कि अब यहां से जो राह आगे जाएगी, उसे अकेले ही तय करना पड़ेगा। दिल की आवाज बनने के लिए मां आसपास कहीं नहीं होंगी, तब अपनी आवाज को ही बुलंद करना होगा।
पिता ने दूसरा विवाह कर लिया, तो हालात और मुश्किल हो गए। अफसोस, बिन मां की वह बेटी कभी अच्छी लड़कियों में नहीं गिनी गई। शायद उसे बहुत अच्छा बनना भी नहीं था, पर वह पढ़ाई में अव्वल थी। गायन, वादन, नृत्य में कुशल थी। स्टेज पर ड्रम बजाती थी, तो कभी गिटार बजाती थी। जिस दिन उसके पास कुछ पैसे जुट गए, वह पहली बार हवाई जहाज पर सवार अपने मिशिगन को छोड़ ख्वाब के नगर न्यूयॉर्क पहुंच गई। बिन मां की वह बेटी, ऊंचाई पर पहुंचना चाहती थी। वह ग्लैमर की दुनिया में खो गई। पिता और परिवार से संपर्क लगभग टूट गया।
कुछ ही वर्ष बाद एक दिन आया, जब पिता ने रेडियो पर एक गीत सुना, एवरीबॉडी, कॉम ऑन, डांस ऐंड सिंग / एवरीबॉडी, गेट अप ऐंड डु योर थिंग। वह बड़े अचंभित हुए कि यह तो उनकी सबसे बड़ी बेटी मैडोना की दिलकश आवाज है और यह उसी का लिखा गीत है, जिसे अब पूरी दुनिया सुन रही है।
मैडोना गीत-दर-गीत शोहरत के शिखर पर चढ़ती चली गईं। उन्होंने पश्चिमी संगीत और पॉप कल्चर को बदलकर रख दिया। वह अपने पहले एलबम के बाद ही दुनिया की सबसे महंगी गायिका बन गईं। उन्होंने फिल्मों में भी अभिनय किया। उनकी खूबसूरती ने उनकी कला में चार चांद लगा दिए।
16 अगस्त को जन्मीं मैडोना (जन्म 1958) 68 साल की हो चुकी हैं। इस उम्र में भी वह स्टेज पर किसी नवयौवना की तरह नाचती-गाती हैं। वह पॉप संसार में यूनिवर्सिटी की तरह हैं। अनगिनत कलाकारों ने उनकी खूबियों से ही नहीं, उनकी कमियों से भी बहुत सीखा है। संगीत प्रदर्शन से शास्त्रीय शिक्षा तक मैडोना की रचनाओं, विचारों, प्रभावों को बार-बार याद किया जाता है।
…और मैडोना अक्सर अपनी मां को याद करती हुई अंग्रेजी में जो गीत गाती हैं, उसके भाव देखिए, ‘एक समय था, जब मेरी एक मां थी। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता…। / मैं समझ न पाई, मैं तो बस एक बच्ची थी…। / ओह मां, आप मेरे साथ क्यों नहीं हैं… / मैं कर रही हूं अपने आंसू पोंछने की पूरी कोशिश।’
(हिन्दुस्तान में प्रकाशित मेरे कॉलम से)








