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चार चराग तेरे बरन हमेशा

(जितना मैं समझ पाया हूं, उतना पेश हैयह टिप्पणी तब लिखी गई थी जब शाहबाज कलंदर की दरगाह पर हमला हुआ था ) वे भटके हुए लोग सदियों से चीख रहे हैं कि खुद को सूफी संत कहकर पूजा-आराधना लेने वाले शैतान के नबी...