गालियां, गुंडे और स्याही की सियासत

यह बात वामपंथी भी मानते हैं और अपने मुखपत्रों में लिख-छाप चुके हैं कि ‘कॉकरोच इसलिए भी जीते, क्योंकि बदतमीज थे’। कॉमरेडों को शायद यह लगने लगा है कि बदजुबानी भी एक मुकम्मल जवाब हो सकती है। क्या गालियों की बौछार से सरकारों को डराया जा सकता है? शायद हां। दरअसल, सरकारी दफ्तरों में बैठे …

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