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पटना से बैदा बोलाई दऽ

भोजपुरी के सबसे बड़े गीतकार की राम कहानी महेंद्र मिसिर भोजपुरी गीतकार व गायक वह दादी के दुलारे थे। उन्हें दादी ने ही महादेव के मंदिर महेंद्रनाथ में माथा टेकते मांगा था। सब मान रहे थे कि महेंद्रनाथ के प्रताप से ही पत्थर पर पुष्प खिला है, आंगन में बरसों इंतजार के बाद किलकारियों की …

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आनंद बख्शी की जिंदगी का सफर

जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो… आनंद बख्शी विख्यात गीतकार चूंकि जिंदगी हर कदम एक नई जंग है, तो जिंदगी इम्तिहान लेती है और लोग इम्तिहान में कामयाब होने की जद्दोजहद में जुटे रहते हैं। रावलपिंडी के आठवीं पास नौजवान के साथ भी ऐसा ही था, जिसकी जुबां उर्दू थी और फितरत फारसी। …

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अच्युता गोपी कैसे बन गई कृष्ण भक्त?

जब कुंज बिहारी को खुलकर पुकारा अच्युता गोपी कृष्ण भक्त गायिका   कोई रंग असुंदर नहीं। हर रंग का अपना सौंदर्य है। प्रकृति में श्वेत की सुंदरता अश्वेत से और अश्वेत की सुंदरता श्वेत से है, पर मानव समाज में श्वेत के वर्चस्व की भ्रांति पता नहीं कब से एक रोग की तरह संक्रमित है। …

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ख्वाजा अब्दुल हामीद और अखंड भारत

दिल-दिमाग में बसा रहा अखंड भारत भारतीय राष्ट्रवादी उद्यमी कुछ शख्स ऐसे होते हैं, जिनकी जिंदगी में कदम-कदम पर बड़े  मोड़ आते  हैं। अलीगढ़ के उस नौजवान के साथ भी ऐसा ही था। दस की उम्र तक मदरसे में दीनी तालीम हासिल हुई, हाफिज हुए और उसके बाद अचानक जिंदगी सामान्य शिक्षा की ओर मुड़ी। …

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महावीर मोहम्मद उस्मान को भूल न पाएगा भारत

वीर कभी तमाशा नहीं देखा करते महावीर चक्र विजेता योद्धा बनारस के कोतवाल साहब का वह लड़का अलग ही मिट्टी का बना था। उम्र किशोर वय अर्थात तेरहवें साल पर अभी चढ़ी ही थी। वह थोड़ा हकलाता था, पर कभी किसी काम में हिचकता नहीं था। दोस्तों के साथ गांव-गली में जितना खेलता था, उससे …

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अब्दुल हमीद कैसे बने परमवीर विजेता

देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून अब्दुल हमीद परमवीर चक्र विजेता एक वेद वाक्य है- मा हस्यिंात सर्वा भूतानि अर्थात किसी भी जीव के साथ हिंसा न कीजिए। भारतीय संस्कृति में यहां तक संदेश दिया गया है कि मन में भी किसी के प्रति हिंसा का भाव न लाएं। तभी तो मानव इतिहास …

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हरि ओम शरण कैसे बने भजन गायक?

हरि ओम शरण भजन गायक समय बदलावों की बारिश करते हुए भागता रहता है।  बताते हैं, महाराजा रणजीत सिंह के समय लाहौर में बनारस से भी ज्यादा मंदिर, गुरुद्वारे थे। आज से सौ साल पहले हर दस लाहौरी में पांच टोपी वाले, तीन टीके वाले और दो पगड़ी वाले थे। अमृतसरी गेट और लाहौरी गेट …

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नए लालू नहीं, नए नीतीश की जरूरत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 पिछले अनेक चुनावों में सबसे यादगार रहेगा। इस सदी में यह पहला चुनाव है, जिसमें बिहार में पीढ़ी परिवर्तन होता दिख रहा है। पिछले चार या पांच दशक से जो नेता बिहार की राजनीति को संचालित कर रहे थे, इस चुनाव में कमजोर पड़ते दिखे हैं। लालू प्रसाद यादव अब पिछली …

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फिर मिला लौंडा नाच का नचनिया मनोज

पंद्रह साल बाद लौंडा नाच का नचनिया मनोज फिर गांव में दिखा। उसे देखते ही पुरानी यादें ताजा हो गईं। साल 2010 में उससे मुलाकात हुई थी, तब वह पैदल ही घर के सामने से जा रहा था और उसे रोककर मैंने कुछ बातें की थीं, जिसे मैंने तब लिखा भी था। इस बार साल …

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शायद जाग रहे बिहारी

बिहार तो बहुत रुलाता ही है, पर उत्तर प्रदेश को भी अक्सर अपशब्द सुनने पड़ते हैं। जिसे देखिए, वही उत्तर प्रदेश और बिहार को निशाने पर लेकर आलोचना करता है। लोग यह भूल गए हैं कि देश जब आजाद हुआ था, तब 1960 के दशक में उत्तर प्रदेश (तब अविभाजित) देश का सबसे बड़ा आर्थिक …

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