Gyanesh Upadhyay

खुदा के लिए समझिए कि हम भी कुछ समझते हैं – सरदार पटेल

सत्य सदा धर्म से ऊपर है। गलती करते हैं लोग, जब धर्म को ही सत्य मान लेते हैं और समस्या बन जाते हैं लोग, जब धर्म के अधीन असत्य का सहारा लेने लगते हैं। धर्म की विजय के लिए भी अगर कोई असत्य घटित होता है, तो भगवान श्रीकृष्ण को भी जहरीले वाण झेलने पड़ते …

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होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे मिर्जा ग़ालिब जब दिल्ली थे, तब यहां करीब तीन लाख लोग रहते थे, आज तीन करोड़ के करीब रहते हैं। उनके सामने ही दुनिया बच्चों के खेलने का मैदान (बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल) थी, जहां रात-दिन तमाशा होता था। आज भी होता है, जब ग़ालिब नहीं हैं। लाल किले …

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ए रंगबती रे रंगबती

ए रंगबती रे रंगबती रंगबती-रंगबती कनक लोता हसी पदे कह लो कोथा हाय गो लाजे-लाजे गो लाजे-लाजे लाज लागे नोई जाउछे माथा गो नाईकर नाईकर ओथा… यह गाना जब बजता है या याद आता है, तो नोस्टेलजिक बना देता है। मन करता है, भागकर उड़ीसा की गलियों में चले जाएं। यह गीत अक्सर चर्चा में …

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महाकुम्भ मेला 2025 सुखद-दुखद स्मृतियां

महाकुम्भ मेला 2025 अपनी सुखद-दुखद स्मृतियों के साथ समाप्त होने को है। कितनों ने कितना पुण्य कमाया, यह विचार की बात नहीं है, सहज स्वीकार्य आस्था की बात है। तर्क अपनी जगह है और कुम्भ की अनेक बातें अपनी जगह। सुविधा है कि आप प्रश्न उठा सकते हैं। प्रश्नों और उनके उत्तर से श्रद्धा बढ़ती …

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फिर लौट जाएंगे उस देश कुरजां

जाड़ा शुरू होने से पहले ही वो भारत आ जाते हैं और जाड़ा खत्म होते ही वापस लौट जाते हैं। अब भारत में गर्मी शुरू हो रही है और कुरजां के लौट जाने का समय हो रहा है। दूर देश से चले आते हैं पक्षी…दूर देश को चले जाते हैं…क्योंकि  इन्होंने दुनिया को नहीं बांटा…। …

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संस्कृत और देवनाथन जी की याद

(संस्कृत की चर्चा होती है, तो प्रोफेसर रामानुज देवनाथन जी मुझे अनायास याद आते हैं।) १८ फरवरी २०१६ को नई दिल्ली में उनसे अंतिम भेंट हुई थी। राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी पर केन्द्रित विद्वतापूर्ण आयोजन था। रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्य और केन्द्रीय मंत्री उमा भारती के साथ मंच पर विराजमान वे अपना व्याख्यान …

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सिर्फ 18 रुपये 75 पैसे का था एक तोला सोना

सोने की बढ़ती कीमत आश्चर्य में डाल देती है। जब भी सोने की कीमत की चर्चा चलती है, तो लोग सोचने लगते हैं कि पहले कितना सस्ता था सोना। हालांकि, सच यही है कि सोना कभी सस्ता नहीं रहा है। आज सोने का भाव प्रति तोला 85 हजार रुपये तक पहुंच गया है, पर सौ …

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गंगा कभी-कभी उल्टी भी बहती है

भिखारी ठाकुर, प्रसिद्ध लोक कलाकार सागर के स्वभाव में ही ऐसा उफान है, जो देखने वाले के तन-मन में ज्वार का रोग लगा देता है। उस दिन यही तो हुआ था। एक युवा हजाम सागर के पास अचंभित खड़ा था, ठीक वैसे ही जैसे कभी रामजी के साथ आए वानर खड़े होंगे। पहली बार सागर …

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16 साल पहले भी मैं यही सोचता था

(दिसंबर 2008 में मैंने यह लिखा – अपने ब्लॉग ज्ञानघर पर। आज भी मेरी सोच पत्रकारिता और अपने बारे में ऐसी ही है। ) मैंने खबरों के साथ-साथ विचारों की भी पत्रकारिता खूब की है, अत: तमाम पार्टियों के विचारों से मैं करीबी से रू-ब-रू हुआ हूं। सपा, बसपा हो या भाजपा या कांग्रेस या …

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सौ साल तक बजाता रहूं बांसुरी : पंडित हरिप्रसाद चौरसिया

प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया अब 86 वर्ष के हो चुके हैं। उनका जन्म प्रयागराज में हुआ था और अब वह मुंबई में रहते हैं। अभी भी बांसुरी वादन करते हैं और उनकी इच्छा है कि उम्र के सौ साल तक बांसुरी बजाते रहें। बांसुरी बजाते हुए उनका मन अभी नहीं भरा है और …

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