संपादन की समस्या और समाधान-2

योजना में कमी

सम्पादन में योजना की बड़ी अहमियत होती है। कार्य या पृष्ठ की योजना या जरूरत को ध्यान में रखे बिना समाचार या विचार के सम्पादन की जल्दी कई बार खराब रूप में सामने आती है। आजकल पैकेज तैयार करने का बड़ा चलन है। एक तरह की खबरों को एक जगह लगाने की शैली जोर पकड़ती जा रही है, यह सही भी है, लेकिन इसमें कई बार बहुत असंगत चीजें या सामग्री देखने में आती है। आम तौर पर रिपोर्टिंग डेस्क से खबरें आती जाती हैं और उन्हें जैसे-तैसे सम्पादित करके पृष्ठ पर लगाने की जल्दी मची रहती है। खबरों के साथ अकसर अन्याय होता है, कई बार विचार या लेख या फीचर के साथ भी अन्याय होता है, दिशा भटकने का खतरा होता है।
समाधान: अकेली या छोटी खबरों में की भी अपनी योजना हो सकती है। पाठक की जरूरत के हिसाब से योजना तैयार करनी पड़ती है, कई बार किसी छोटी खबर को भी विस्तार देना जरूरी हो जाता है। ज्यादातर खबरों के बारे में पहले पता चल जाता है, अतः उनके बारे में पर्याप्त योजना बनाकर सम्पादन को अंजाम देना चाहिए। अप्रत्याशित खबरों के लिए विशेष व्यवस्था हो सकती है। कई दफा रिपोर्टिंग डेस्क भी भटकता है, महत्वपूर्ण खबरों में जरूरी पक्ष आने से रह जाते हैं, ऐसे में सम्पादक समूह अगर योजना बनाकर काम करे, तो किसी भी खबर के जरूरी पक्ष को सामने लाने का निर्देश दिया जा सकता है। अच्छे सम्पादक योजना बनाकर काम करते हैं और रिपोर्टिंग टीम को लक्ष्य और दिशा देकर काम करवाते हैं। पैकेज तैयार करते समय योजना अवश्य बनानी चाहिए योजना में केवल खबरों को ही नहीं, फोटो, इलेस्ट्रेशन या कार्टून को भी शामिल करके सोचना चाहिए।

समाचार बोध की समस्या

भविष्य में भी शायद ही कोई समाचार पत्र कार्यालय होगा या शायद ही कोई ऐसा न्यूज रूम होगा, जहां समाचार बोध की समस्या सामने नहीं आएगी। समाचार को समझना और उसको सही सिरे से पकड़कर उठाना कुछ लोगों के लिए आसान है, तो कुछ लोगों के लिए कठिन भी होता है। आजकल कई खबरें ऐसी भी छपती हैं, जिनसे पाठक की मामूली जिज्ञासाओं का भी समाधान नहीं हो पाता है। तोड़-फोड़ की खबर बहुत जगह लेकर फोटो के साथ प्रकाशित की जाएगी, लेकिन यह नहीं पता चलेगा कि तोड़-फोड़ हुई क्यों। कहीं किसी चौराहे पर कत्ल हो गया, लेकिन यह नहीं बताया जाएगा कि कत्ल किसका हुआ, क्यों हुआ। यह समस्या इसलिए आती है कि कई पत्रकारों का समाचार बोध विकसित नहीं होता है। समाचार बोध की समस्या वास्तव में सम्पादन की समस्या है। किसी समाचार पत्र में अगर समाचार अच्छे नहीं हैं या जरूरत के अनुरूप नहीं हैं, तो फिर यह समाचार बोध की समस्या का ही परिणाम है, इसके लिए सम्पादकों की टीम ही दोषी है।
समाधान : कई रिपोर्टर होते हैं, जो पड़ताल करने की जरूरत महसूस नहीं करते हैं, क्योंकि उनमें समाचार बोध बहुत विकसित नहीं रहता है। ऐसे में सम्पादन डेस्क की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। सम्पादन डेस्क का समाचार बोध अगर ठीक हो, तो वह रिपोर्टरों को समाचार लाने के लिए प्रेरित या निर्देशित कर सकता है। सम्पादन डेस्क स्वयं भी समाचारों पर चिंतन कर सकता है। समाचारों के विकास को दिशा दे सकता है। सम्पादन डेस्क पर कार्यरत पत्रकारों को ही नहीं, बल्कि उनके प्रभारी को भी बहुत सचेत रहना चाहिए। विशेष रूप से प्रभारी के चयन में समाचार बोध की योग्यता का ध्यान जरूर रखना चाहिए। डेस्क प्रभारी का अगर समाचार बोध सही होगा, तो वह अपनी डेस्क टीम का नेतृत्व सफलतापूर्वक कर सकता है, साथ ही साथ वह अपने साथियों में समाचार बोध के विकास के लिए भी काम कर सकता है।

\"\"

(अगली बार पढ़िए – प्रूफ की समस्या और समाधान)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *