बर्मिंघम के मैदान पर भारत कभी टेस्ट मैच नहीं जीता था। टाइगर पटौदी से लेकर बुमराह की कप्तानी तक भारत को एक के एक हार मिलती रही। कुल आठ टेस्ट मैच हुए थे, जिनमें से केवल एक मैच भारत यहां ड्रा पर रोक पाया था। कपिल देव को ही यहां मैच ड्रा कराने का गौरव हासिल था, पर अब शुभमान गिल को यहां मैच जिताने का जो गौरव हासिल हुआ है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। बर्मिंघम में मिली इस पहली जीत को कभी भुलाया न जा सकेगा। टेस्ट मैच में कुल 1014 रन करने का रिकॉर्ड हो या कप्तान शुभमान गिल के बल्ले से निकले 269 और 161 रन हों, चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। इस टेस्ट में कप्तान ने अकेले ही 430 रन बनाए हैं, पता नहीं उनका यह रिकॉर्ड अब कौन भारतीय तोड़ पाएगा। कप्तान के रूप में यह उनकी पहली जीत है और उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है। उन्हें ध्यान रखना होगा कि क्रिकेट में अभी बहुत कुछ ऐसा है, जिसे भारतीय टीम ने आजतक हासिल नहीं किया है।
लीड्स में खेले गए पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड की टीम को मिली जीत से भारतीय क्रिकेट प्रेमियों में जो उदासी थी, उसे भी हम भुला नहीं पाएंगे। पांच-पांच शतक के बावजूद भारतीय टीम हार गई थी और बुमराह की गेंदबाजी दूसरी पारी में इतनी हल्की साबित हुई थी कि दूसरे टेस्ट मैच में एक तरह से उन्हें नहीं खिलाया गया था।
ध्यान रहे, बुमराह की जगह आकाश दीप लाए गए और बिहार की माटी के इस लाल ने कमाल कर दिया। 28 वर्षीय आकाश दीप दूसरी पारी में 6 विकेट गिराने में कामयाब रहे और उन्होंने बर्मिंघम टेस्ट में कुल 10 विकेट लिए हैं। आकाश दीप संघर्ष की एक मिसाल हैं। उन्होंने जब क्रिकेट की शुरुआत की थी, तभी पिता और बड़े भाई को गंवा दिया था और उन पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। उन्होंने एक तरफ क्रिकेट खेलकर ही अपने परिवार को चलाया है। आज बर्मिंघम में जीत के बाद उन्होंने अपनी ताजा कामयाबी को अपनी बहन को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि जब भी मैं गेंद ले रहा था, मुझे कैंसर से पीड़ित अपनी बहन का चेहरा ध्यान में आ रहा था, मैं अपने बेहतर खेल से अपनी बहन के चेहरे पर खुशी देखना चाह रहा था और आज मेरी बहन खुश होगी और मैं भी खुश हूं।
आकाश दीप की सफलता से उत्तर भारत के न जाने कितने युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। खासकर उस बिहार को भी एक नया नायक मिला है, जहां चमकदार नायकों को बहुत जरूरत है। उस बंगाल में भी खुशी का संचार होगा, जहां आकाश दीप को आगे बढ़ने की राह मिली। वह भारतीय गेंदबाजी का भविष्य हो सकते हैं। वह प्रतिघंटा 135 किलोमीटर की गति से जिस तरह से गेंद को बाहर और अंदर घुमाते हैं, उससे बल्लेबाजों को बहुत परेशानी होती है। अगर उन्होंने खुद को कुछ किफायती बना लिया, तो फिर उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह ध्यान देने की बात है कि पिछले टेस्ट में भारत ने रन तो बहुत बनाए थे, पर गेंदबाजों से ज्यादा मदद नहीं मिली थी। गेंदबाज अगर चल जाते, तो पिछले टेस्ट में भी भारत जीत सकता था। बर्मिंघम के मैदान में अपनी गेंदबाजी से आकाश दीप ने भारतीय गेंदबाजी को जो धार दी है, उसी का नतीजा है यह ऐतिहासिक जीत। जो पहले कभी नहीं हुआ था, वह हो गया।
क्रिकेट केवल खेल नहीं है, यह भावनाओं की प्रस्तुति भी है। जब कोई खिलाड़ी पूरे भाव और लगन के साथ मेहनत करता है, तो उसे कामयाबी मिलती है। बर्मिंघम में जीतने वाली पूरी टीम की सराहना होनी चाहिए। खासकर, मोहम्मद सिराज, रविंद्र जडेजा, ऋषभ पंत, के एल राहुल, यशस्वी जायसवाल का नाम गर्व से याद रखना चाहिए।
यह भी जरूर कहना चाहिए कि भारतीय टीम ने अपने क्षेत्ररक्षण में सुधार किया है। बल्ले और गेंद, दोनों ही मोर्चों पर भारत का प्रदर्शन सुधरा है। बर्मिंघम की जीत से बुमराह का भी मनोबल बढ़ेगा और वह लॉर्ड्स के मैदान पर कमाल दिखाने के लिए प्रेरित होंगे।








