सत्यं वद, धर्मं चर के जयघोष के बावजूद संसार का क्या हाल है? कितने लोग सत्य के दीपक जलाए हुए हैं? भारत की ही बात करें, तो यहां 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के पास सोशल मीडिया की पहुंच है और सोशल मीडिया पर कम से कम 37 प्रतिशत सूचनाएं झूठी होती हैं। रॉयटर्स इंस्टीट्यूट द्वारा साझा किए गए एमआईटी के अध्ययन से पता चलता है कि जहां सत्य शायद ही कभी 1,000 से अधिक लोगों तक पहुंच पाता है, जबकि झूठी खबरें बहुत आसानी से एक लाख लोगों तक पहुंच जाती हैं। किसी असत्य का वायरल हो जाना आज के युग में एक सबसे बड़ी समस्या है। चूंकि असत्य ज्यादा तेजी से फैलता है, इसलिए असत्य फैलाने का एक पूरा कारोबार विकसित हो गया है। यह समाज और सभ्यता के लिए अशुभ ही नहीं, भयावह है। ऐसा नहीं है कि लगभग 80 प्रतिशत साक्षर भारत में ही फेक न्यूज का अश्लीलता फैली हुई है, लगभग 100 प्रतिशत साक्षर अमेरिका भी ऐसी ही अश्लीलता से लड़ रहा है। अमेरिका में झूठी रिपोर्टिंग की अधिकता के चलते करीब दो-तिहाई वयस्क जनसंचार माध्यमों पर बहुत कम या बिल्कुल भरोसा नहीं करते हैं। भारत हो या अमेरिका, फर्जी खबरें हर हाल में बहुत खतरनाक होती हैं, जनमत को खराब करती हैं और ज्ञान-विज्ञान के प्रति लोगों के अविश्वास को बढ़ाती हैं। असत्य की अधिकता से अविश्वास जब बढ़ता है, तब हिंसा और आर्थिक नुकसान को बल मिलता है। किसी एक असत्य से भी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
सावधान, आज असत्य हमें विभिन्न रूपों में घेरने लगा है। स्वर्ण की लंका पर काबिज रावण भी असत्य का चोला ओढ़कर आया था और हर तरह से शिक्षित-सजग माता सीता को भ्रमित करने में कामयाब हो गया था। रावण अगर साधु रूप में न आता, तो सीता हरण नहीं हुआ होता। सीता अपना बचाव करने में पूर्ण रूप से सक्षम थीं, लेकिन वह साधु वस्त्र में आए रावण को पहचानने में भूल कर बैठीं। रामायण के इस प्रसंग से कुछ और पीछे चले जाइए, तो सुंदरी का रूप धरकर आई सूर्पणखा भी ‘फेक न्यूज’ की तरह ही थी, लेकिन तपस्वी राम और लक्ष्मण ने अपने सजगता, ज्ञान और चरित्र से उस ‘फेक न्यूज’ के महाजाल को काट दिया था। वह फेक न्यूज जब सीता पर आक्रामक हुआ, तब उसके नाक पर वार हो गया। सीता पर हमला करने की कोशिश अक्षम्य थी, लेकिन सूर्पणखा को स्त्री होने का लाभ मिला। एक व्यावहारिक पहलू यह भी है कि सूर्पणखा नामक ‘फेक न्यूज’ को मामूली दंड देकर छोड़ दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप एक महायुद्ध हुआ। लंकापति रावण ने भी अपनी बहन सूर्पणखा की ‘फेक न्यूज’ कुप्रथा को आगे बढ़ाया और सत्य के प्रतीक राम के हाथों उसका समूल विनाश हो गया।
आज संसार में समस्याएं अनगिनत हैं, लेकिन झूठ एक महा-समस्या है।
झूठ को बेनकाब करना होगा। विश्वास को बचाना होगा। अफवाह से बचना होगा। स्वास्थ्य की चिंता करनी पड़ेगी। हिंसा से बचना होगा। अनावश्यक सामुदायिक ध्रुवीकरण को समझना होगा। ठगी, मिलावट को मुंहतोड़ जवाब देना होगा। अंधाधुंध चलने के बजाय सत्य की छत्रछाया में फूंक-फूंककर कदम बढ़ाना होगा।








