रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की तुलना व्यर्थ है, पर मुंबई इंडियन टीम की कप्तानी से जिस तरह से रोहित शर्मा को हटाकर हार्दिक को कप्तान बनाया गया है, उससे क्रिकेट की दुनिया को हमेशा के लिए एक विवाद मिल गया है। कप्तानी से हटाए जाने के बावजूद रोहित शर्मा अच्छा खेल रहे हैं, जबकि हार्दिक को अभी फार्म की तलाश है। बेशक हार्दिक भविष्य हैं, पर रोहित शर्मा तो अभी भारतीय टीम का वर्तमान हैं।
मुंबई इंडियन के प्रबंधन ने जिस कारपोरेटी ढंग से फैसला लिया कि भारतीय टीम का कप्तान उनकी टीम का कप्तान नहीं हो सकता, उससे एक दुखद इतिहास बना है, जिससे हार्दिक आने वाले वर्षों में उबर नहीं पाएंगे। मुंबई इंडियन का प्रबंधन एक साल रुक सकता था, ताकि भारतीय टीम के कप्तान की अवहेलना नहीं होती। फैसले योग्यता पर आधारित होने चाहिए, सनक या मनमानी पर नहीं।
मुंबई इंडियन का प्रबंधन शायद भूल गया, पर लोग कैसे भुला दें? 30 अप्रैल को 37 वर्ष के होने जा रहे रोहित शर्मा ने साल 2013 में मुंबई इंडियन की कप्तानी संभाली और पहली बार मुंबई इंडियन आईपीएल टूर्नामेंट जीतने में कामयाब हुई। वह आईपीएल में महेंद्र सिंह धोनी के बाद सबसे सफल कप्तान हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित शर्मा 48 शतक और 101 अर्धशतक ठोंक चुके हैं।
खेल में तुलना बेकार
हार्दिक पांड्या ने विश्व क्रिकेट में अभी तक केवल एक शतक लगाया है और वह भी टेस्ट मैच में, जिसे वह खेलना ज्यादा पसंद नहीं करते हैं और उन्होंने आखिरी बार टेस्ट साल 2018 में खेला था। यह कहा जा सकता है कि हार्दिक पांड्या तेज-तर्रार खिलाड़ी हैं और वह ताबड़तोड़ खेल में विश्वास करते हैं, और उनके खाते में अभी तक 18 अर्धशतक दर्ज हुए हैं। यहां यह तर्क दिया जा सकता है कि हार्दिक ऑल राउंडर हैं। मीडियम फास्ट बॉलिंग करते हैं, हालांकि, यहां भी गौर करने की बात है कि हार्दिक अभी तक केवल एक बार पांच विकेट लेने में कामयाब हुए हैं और वह भी उन्होंने एक बार टेस्ट मैच में ही लिया था, जोकि उन्होंने पांच साल से ज्यादा समय से खेलना बंद कर रखा है। किसी गेंदबाज के पांच विकेट की तुलना किसी बल्लेबाज के एक शतक से की जाती है, तो यहां कहा जा सकता है कि अपने करियर में हार्दिक ने दो शतक या दो बार पांच-पांच विकेट बराबर प्रदर्शन किया है। हार्दिक फटाफट बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, पर उन्होंने किसी भी फारमेट में किसी भी मान्य स्तर पर फस्र्ट क्लास क्रिकेट में कुल मिलाकर केवल एक ही बार शतक जड़ा है।
हां, यह कहा जा सकता है कि हार्दिक बहुत अच्छे आईपीएल या ट्वंटी ट्वंटी खिलाड़ी हैं। अपनी कप्तानी में गुजरात टाइटंस को एक बार खिताब दिला चुके हैं और दूसरी बार फाइनल तक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। कम से कम चार बार मुंबई इंडियंस को खिताब दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें याद किया जाता है। उन्हें एक दर्शनीय खिलाड़ी के रूप में देखा जाता है। उनसे लोग बहुत उम्मीद करते हैं, पर अभी हार्दिक का पूरी तरह साबित होना शेष है और वह अभी भारतीय टीम के किसी भी फारमेट फिट नहीं बैठ रहे हैं। रोहित के साथ तुलना हार्दिक के साथ नाइंसाफी है।
रोहित शर्मा एक अलग मुकाम के क्रिकेटर हैं, जबकि हार्दिक का अपना अलग स्टाइल है। सबकी अपनी-अपनी सीमा और अपनी-अपनी भूख होती है। रनों या विकेटों की भूख ही किसी खिलाड़ी को आगे ले जाती है, इस लिहाज से रोहित शर्मा में ज्यादा भूख दिखती है।
यह अलग सवाल है कि हार्दिक में भूख का क्या स्तर है? क्या वह समय से पहले संतुष्ट हो गए हैं? क्या उनके सपने साकार हो गए हैं? अगर उनके सपने साकार हो गए हैं, तो उन्हें आगे बढ़ने में मुश्किल होने वाली है।
गौर करने की बात है कि रोहित शर्मा अगले एकदिवसीय विश्व कप के बारे में सोच रहे हैं, जबकि हार्दिक अभी भारतीय टीम में वापसी की बुनियाद तलाश रहे हैं। वापसी की बुनियाद तभी तैयार होगी, जब बल्लेबाजी या गेंदबाजी में वह चमकेंगे। एक कामयाब और सबसे अमीर आईपीएल टीम की कप्तानी का भार उन पर साफ दिख रहा है। हार्दिक को एक बेहद अनुशासित और मेहनती खिलाड़ी के रूप में अपनी छवि का विकास करना चाहिए। क्रिकेट से इतर जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन, विज्ञापन, मौज-मस्ती, दिखावा या अहंकार का प्रदर्शन उन्हें अच्छे खेल से दूर ले जाएगा।
इस दुखद विवाद से सभी खिलाड़ियों को सीखना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट में बहुत पैसा है। पांच-दस करोड़ रुपये कमा लेने वाले किसी भी खिलाड़ी को खुद पर गुमान हो सकता है, पर गुमान पैसे का नहीं, अच्छे खेल का होना चाहिए। पैसा अगर सिर पर चढ़ेगा, तो खेल उतर जाएगा और खेल अगर सिर चढ़ेगा, तो पैसा खुद ब खुद पीछे आएगा। कौन सी स्थिति बेहतर है, यह खिलाड़ियों को स्वयं समझना चाहिए। भारतीय क्रिकेट में अच्छे खिलाड़ियों की एक बड़ी नई पीढ़ी सामने आ रही है। शुभमन गिल, रिंकू सिंह, मयंक यादव, यशस्वी जायसवाल, शुभम दुबे, तिलक वर्मा, अभिषेक शर्मा, श्रेयस अय्यर, रितुराज गायकवाड़ इत्यादि को अपने खेल पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
खैर, हार्दिक 30 वर्ष के हो चुके हैं, अब पर्याप्त गंभीरता आ जानी चाहिए। देखना चाहिए कि 30 की उम्र में ऑलराउंडर कप्तान कपिल देव कहां थे। जी हां, हार्दिक को कपिल देव का रिकॉर्ड देखना चाहिए। साल 1983 में विश्व कप क्रिकेट में कपिल के बल्ले से जब नाबाद 175 रन निकले थे, तब उनकी उम्र महज 24 साल थी। उम्र इंतजार नहीं करती है, गेंद दर गेंद बीतती चली जाती है।
अपनी प्रतिभा, साहस और आत्मविश्वास के दम पर हार्दिक बेहतर खिलाड़ी और कप्तान साबित हो सकते हैं, पर सबसे जरूरी है खेल पर पूरा ध्यान देना। खेल नहीं, तो कुछ भी नहीं।








