जोधपुर जफर बिना… जंचै ई कोनी
जफर खान सिंधी को श्रद्धा अर्पित आजकल कुछ ऐसे लोग गए हैं, जो मेरे अंदर से भी कुछ ऐसा ले गए हैं कि शब्द कम पड़ने लगे हैं। लिखने के लिए कलम की नीब को ठोस होना पड़ता है, पर जब नीब ही पिघलने लगे, तो क्या कैसे लिखा जाए…। बीते सप्ताह जफर खान सिंधी …
