कोयल नदी
(प्यारे साथी अमलेंदु के लिए) हमने जीया है गले तक बहता बारिश भर प्यार। हरियाये पहाड़ों के रोमछिद्रों से उमड़ते, उतरते बहते बादल कभी गले से नथुने तक। मां की तरह रंगबिरंगी छोटी-छोटी नावों के ख्वाब दिखाकर धीरे से उस नदी ने हमें पिला दिया है सच्चे प्यार का मटमैलापन। और निगोड़ी जीभ आज भी …
