अभिनय के आधुनिक गुरु – स्टैनिस्लावस्की
उस बच्चे को बहुत पुचकारकर तैयार किया गया था। न केवल मंच पर पहली बार उतारा गया था, बल्कि एक जगह बैठा भी दिया गया था कि उछल-कूद की जरूरत न पड़े। अभिनय के लिए बहुत गुंजाइश नहीं थी। मंच को रुई से ढक दिया गया था। बीच में कुछ सदाबहार हरियाली थी, उस पर …
